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अमेरिका ने कहा-करार पर कोई नई शर्त नहीं

भारत को परमाणु कारोबार की छूट दन क मसल पर चर्चा क लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता दशों क समूह (एनएसजी) की दो दिवसीय बैठक गुरुवार को विएना मं शुरू हो गई। भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर नए रहस्योद्घाटन से छिड़े बवाल के बीच अमरीकी राजदूत डेविड सी मलफोर्ड ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर अपने देश का पक्ष स्पष्ट किया। इस बीच अमेरिका ने बताया है कि करार की दिशा में साकारात्मक प्रगति हुई है। वैसे अधिकारियों ने इस मुलाकात के बारे में कोई ब्यौरा नही दिया लेकिन समझा जाता है कि श्री मलफोर्ड ने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि समझौते को लेकर भारत पर कोई नई शर्त नही थोपी जा रही है।ड्ढr ड्ढr छूट मिलन की स्थिति मं भारत क लिए परमाणु कारोबार का रास्ता खुल जाएगा। उधर एनएसजी के कई सदस्य अब भी ड्राफ्ट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं व कुछ और बदलावों के पक्ष में हैं। इन देशों में आस्ट्रिया, न्यूजीलैण्ड, आयरलैण्ड और स्विटरलैण्ड प्रमुख हैं। जबकि भारत ने अपना रुख साफ करने के बाद अब गेंद पूरी तरह अमेरिकी कूटनीतिज्ञों के पाले में उछाल दी है। 45 सदस्यीय एनएसजी दुनिया भर क परमाणु ईंधन और उपकरण आपूर्ति को नियंत्रित करता है। भारत इस संगठन क मौजूदा दिशानिर्दशों स ‘स्पष्ट छूट’ चाहता है। विपक्ष का आरोप- सरकार ने जनता को गुमराह कियाड्ढr नई दिल्ली (एजेंसियां)। परमाणु करार पर अमेरिकी रुख के रहस्योद्घाटन के बाद भाजपा न प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह क इस्तीफ की मांग करत हुए कहा है कि यदि व एसा नहीं करत हैं तो उन्हं तत्काल संसद का सत्र बुलाना चाहिए ताकि भाजपा उनक खिलाफ संसद की अवमानना का नोटिस द सक। उधर माकपा के महासचिव प्रकाश करात ने भी मनमोहन सिंह पर जनता को परमाणु मद्दे पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव साहिद सिद्दीकी ने भी सरकार पर इस बारे में संसद में झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से इस्तीफे की मांग की है। इस बीच केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि भारत 123 संधि से अमेरिका से बंधा है और यथास्थिति में कोई तब्दीली नहीं आई है।ड्ढr ड्ढr सिब्बल ने कहा- वास्तव में कुछ भी नहीं बदला है। सिब्बल ने परमाणु करार पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय के पत्राचार के लीक होन के संबंध में कहा पत्राचार खुद 123 संधि के मुताबिक है। वहीं, भाजपा क दो वरिष्ठ नताओं पूर्व विदश मंत्री यशवंत सिन्हा और पूर्व विनिवश मंत्री अरुण शौरी न यहां एक संवाददाता सम्मलन मं कहा कि बुश प्रशासन द्वारा अमरिकी प्रतिनिधि सभा क विदश मामलों की समिति क अध्यक्ष हावर्ड एल. बर्मन को लिखे गए पत्र क ताजा खुलास न मनमोहन सरकार की पोल खोल कर रख दी है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि बुश के पत्र के खुलासे के बाद भारत को वियना में हो रही परमाणु सामग्री आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) की बैठक में भाग नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वियना मं चल रही परमाणु आपूर्तिकर्ता दशों क समूह (एनएसजी) की बैठक का कोई औचित्य नहीं है। प्रधानमंत्री को तत्काल इस्तीफा दना चाहिए या तत्काल संसद का सत्र बुलाना चाहिए, ताकि प्रधानमंत्री क खिलाफ संसद की अवमानना का नोटिस दिया जा सक। उन्होंने कहा कि यह विषय इतना महत्वपूर्ण है कि इसके लिए अगले महीने होने वाले संसद के सत्र तक इंतजार नहीं किया जा सकता और हफ्तेभर के अंदर संसद की बैठक बुलाई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि विदेश मामलों से संबंधित अमेरिकी सीनेट की समिति को लिखे 26 पृष्ठ के अपने पत्र में श्री बुश ने कहा है कि यदि भारत परमाणु परीक्षण करता है तो हाइड एक्ट में वर्णित प्रावधानों के तहत उसकी परमाणु आपूर्ति बाधित कर दी जाएगी। भाजपा नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी अमेरिका के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों की पक्षधर है। वह अमेरिका के साथ रणनीतिक भागीदारी चाहती हैं लेकिन असमानता वाले करार के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मानना है कि इस करार के भविष्य को अमेरिका के ऐसे राष्ट्रपति द्वारा तय नहीं किया जाना चाहिए जो दोबारा सत्ता में नहीं आ सकता। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी यह करने का अधिकार नहीं है क्योंकि यह भी हो सकता है कि वे दोबारा सत्ता में नहीं लौटें।

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