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17 नबम्बर, 2019|3:41|IST

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अब एटमी ऊचरा कानून में होगा बदलाव

यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) की रियायत मिलने के साथ ही भारत में परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए पहल का रास्ता साफ हो गया है। करार से पूर्व सरकार ने 2020 तक 20 हजार मेगावाट परमाणु बिजली बनाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन करार के बाद अब इस लक्ष्य को 40 हजार मेगावाट तय ले जाया जा सकेगा। इसके अलावा मौजूदा परमाणु रिएक्टर यूरेनियम की कमी से अभी आधी क्षमता पर काम कर रहे हैं, यूरनियम की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई शुरू हो जाने के बाद इन रिएक्टरों को पुन: प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर पर चलाया जा सकेगा। लेकिन जानकारों लोगों का कहना है कि मौजूदा कानून के अनुसार भारत में केवल सरकारी कंपनियां ही परमाणु बिजली बना सकती हैं। लेकिन बिना निजी निवेश में तेजी के देश में परमाणु बिजली नहीं बनाई जा सकेगी। इसलिए पहले कदम के रूप में सरकार को एटामिक एनर्जी एक्ट में संशोधन करना होगा जिससे निजी क्षेत्र को भी परमाणु बिजली बनाने का अधिकार मिल सके। परमाणु ऊर्जा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार एक्ट में संशोधन करके प्राइवेट कंपनियों को परमाणु ऊर्जा में निवेश, संयंत्र स्थापित करने और परमाणु सामग्री के व्यापार की अनुमति दी जाएगी। इससे विदेशी कंपनियों के लिए भी रास्ते खुल जाएंगे। दूसरे सरकार एटामिक एनर्जी रगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) के अधिकारों को भी बढ़ाएगी। निजी सेक्टर के आने के बाद इसकी जिम्मेदारी बढ़ेगी। इसलिए इसे ज्यादा शक्ितशाली बनाने की योजना है। बोर्ड का निर्माण इस एक्ट के तहत 1में सुरक्षा संबंधी मानकों की निगरानी के लिए किया गया था। एटार्मिक एनर्जी एक्ट में संशोधन की बात प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह भी विगत 22 जुलाई को विश्वास मत के दौरान संसद में कह भी चुके हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि इसमें कुछ ऐसे संशोधनों पर भी विचार किया जा रहा है जिससे कि घरलू मोर्चे पर सरकार हाइड एक्ट को काउंटर कर सके। इसी हाइड एक्ट को लेकर विपक्ष ने एटमी करार का जबर्दस्त विरोध किया था।

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