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डील पर एनएसजी की लगी सील

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की तीन दिनों तक मैराथन बैठक के बाद शनिवार को भारत-अमेरिका परमाणु करार को मंजूरी मिल गई। एनएसजी ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी है। 30 वर्षों से लगे प्रतिबंध हटने के साथ ही भारत के लिए ‘नया परमाणु सवेरा’ हो गया। सबसे बड़ी बात यह है कि एनएसजी से यह हरी झंडी भारत को अपनी शर्तो पर ही मिला है। यह महत्वपूर्ण है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है, जबकि इस संधि पर 18देश हस्ताक्षर कर चुके हैं।ड्ढr ड्ढr इस तरह से भारत को एक तरह से परमाणु शक्ित संपन्न देश मान लिया गया है। एनएसजी में भारत का प्रतिनिधित्व नहीं है, लिहाजा उसका पक्ष रखने का दारोमदार अमेरिका पर ही था। चीन की अगुवाई में एनएसजी के सदस्य देश न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया और आयरलैंड भारत को वैश्विक परमाणु व्यापार के लिए छूट दिए जाने का विरोध कर रहे थे। चीन का कहना था कि भारत को एनएसजी से छूट दिलाने के लिए आखिरी इतनी हड़बड़ाहट क्यों दिखाई जा रही है। चीन के मुताबिक उसे यह छूट 13 साल बाद मिली थी तो भारत को आखिरी एक साल के अंदर ही यह रियायत दिलाने की कोशिश क्यों की जा रही है। हालांकि शनिवार को बैठक के दौरान चीन ने भारत को दी जा रही छूट का विरोध नहीं किया, सिर्फ कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए।ड्ढr ड्ढr भारत द्वारा वर्ष 1में पोखरण में परमाणु परीक्षण किए जाने के बाद विश्व में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू होने की चिंता की वजह से एनएसजी का गठन हुआ था। यह बात भी भारत के खिलाफ जाती थी। चूंकि एनएसजी के गठन का सीधा संबंध भारत से माना जाता है, इसलिए इस संगठन से भारत को वैश्विक परमाणु व्यापार की छूट मिलने का रास्ता और भी मुश्किल लग रहा था। भारत के खिलाफ सन् 1से प्रतिबंध लगे हुए थे जिसके कारण भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए ईंधन हासिल नहीं कर पा रहा था तथा भारतीय कंपनियां व्यापार करने से वंचित थीं। भारत के विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि भारत ने परमाणु परीक्षण पर स्वेच्छा से रोक लगाने की बात कही है, मगर वह किसी कानूनी पाबंदी से बंधना भी नहीं चाहता। उन्होंने कहा था कि भारत परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने, स्वेच्छा से परमाणु परीक्षण रोकने, परमाणु ईंधन सीमित रखने, परमाणु तकनीक का निर्यात नहीं करने और मिसाइल तकनीक को गलत हाथों में नहीं पहुंचने देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बीच भारत पर लगे परमाणु प्रतिबंध हटने की खबर मिलते ही आज कांग्रेस मुख्यालय के बाहर आतिशबाजी की गई। परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह द्वारा भारत के साथ पूर्ण परमाणु सहयोग करने के लिए अपने दिशा निर्देश बदलने को कांग्रेस ने ऐतिहासिक करार दिया। पार्टी ने कहा कि यह देश की ऊर्जा जरुरत पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।ं

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