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किताबें बंटीं ही नहीं सौंपी फचर्ाी रिपोर्ट

राज्य के लाखों छात्रों को किताबें मिली ही नहीं, जबकि प्रकाशक ने शिक्षा परियोजना को इसकी आपूर्ति की रिपोर्ट सौंप दी। अब खुलासा हुआ है कि रिपोर्ट पूरी तरह फर्ाी है। प्रकाशक ने अपनी रिपोर्ट को ‘प्रामाणिक’ बताने के लिए प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों के फर्ाी दस्तखत और मुहरों का इस्तेमाल किया। घोटाले में विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेर में है। हैरतअंगेज यह कि फर्ाीवाड़े के लिए जिम्मेवार प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई की बजाय उसे किताबों की आपूर्ति के लिए अक्तूबर तक की मोहलत दे दी गयी है। शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की स्वीकारते हैं कि किताबों की आपूर्ति में गड़बड़ी हुई है। वह कहते हैं-पहले किताब लेंगे, फिर कार्रवाई करंगे। बताते चलें कि प्रकाशक ने किताबों की आपूर्ति के एवज में 30 प्रतिशत राशि भी अग्रिम उठा ली थी। राज्य सरकार ने गोपशंस पब्लिकेशन को सरकारी स्कूलों में कक्षा तीन, चार, छह एवं सात में किताब सप्लाई का जिम्मा दिया गया था। एग्रीमेंट में यह साफ था कि मई तक सभी स्कूलों में किताब की आपूर्ति कर दी जायेगी। सितंबर तक हालत यह है कि ज्यादातर स्कूलों के छात्र पुस्तक से वंचित हैं। स्कूलों में जब किताबें न मिलने की शिकायतें लगातार मिलीं तो आलाधिकारियों ने प्रखंडों से जानकारी ली। पता चला कि प्रकाशक ने किताबों की आपूर्ति की जो रिपोर्ट सौंपी है, वह फर्ाी है। उसमें बीइइओ के हस्ताक्षर और मुहरं भी फर्ाी हैं। मामले में कई पदाधिकारियों की भी संलिप्तता सामने आ रही है, लेकिन घोटाला सामने आने के साथ ही इसपर पर्दा डालने की कोशिश भी शुरू हो गयी है। फर्ाी रिपोर्ट देनेवाले प्रकाशक पर जहां एफआइआर होनी चाहिए, वहीं उसे किताबों की आपूर्ति के लिए चार अक्तूबर तक की मोहलत दी गयी है। एसा शिक्षा मंत्री बंधु तिर्की के निर्देश पर हुआ है।

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