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बाढ़ में फंसे लोगों के परिचानों को ‘हिन्दुस्तान’ पर भरोसा

ोसी का कहर झेल बाहर निकल रहे लोगों के परिजनों की खुशियां अब सातवें आसमान पर हैं। परिवार के सदस्यों के निकल आने पर उनकी अभिव्यक्ित उनकी खुशी को बयां कर रही है। हालांकि अब भी कई ऐसे परिवार ‘हिन्दुस्तान हेल्प डेस्क’ से लगातार संपर्क में हैं जिनके परिजन कहीं फंसे हैं और निकलना चाहते हैं या फिर उन्हें राहत का सामान चाहिए। कुछ ऐसे भी लोगों ने संपर्क साधा जिनके पास लगातार ऐसी सूचनाएं आ रहीं कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में डायरिया का प्रकोप है। ऐसी तमाम सूचनाएं सरकार और संबंधित नियंत्रण कक्ष तक तत्काल पहुंचायी भी जा रही हैं। रविवार को ‘हिन्दुस्तान हेल्प डेस्क’ का काम शुरू हुआ तो मदद के लिए आगे आए कई लोगों ने डेस्क से संपर्क साधा और जरूरी जानकारियां भी हासिल कीं।ड्ढr ड्ढr सहरसा से अपर्णा मिश्र ने डेस्क को फोन कर बताया कि छातापुर प्रखण्ड में उनके मामा दृष्टिधर मिश्र और परिवार के 20-25 लोग फंसे थे। 5 सितम्बर को उन्होंने डेस्क को इसकी सूचना दी थी। 7 सितम्बर को उनके परिवार के अलावा आस-पास के दर्जनों लोगों को सेना के जवान निकाल लाए हैं। वहां कई बोट भी भेजे गए। इसके लिए उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ का धन्यवाद भी किया। मधेपुरा से हिमागर प्रसाद यादव ने बताया कि 5 सितम्बर को उन्होंने डेस्क को सूचना दी थी कि सुपौल के त्रिवेणीगंज के कई इलाकों में डायरिया के प्रकोप से लोग मर रहे हैं। वहां तत्काल सेना के डॉक्टरों की टीम और दवाएं भेजी गयी हैं और बीमारों का इलाज शुरू हो गया है। श्री यादव की प्रक्रिया रही-‘हिन्दुस्तान’ सिर्फ अखबार नहीं है बल्कि लोगों की सेवा के लिए समर्पित एक संस्था भी है।’ पटना से कुमार रवि रंजन ने डेस्क से संपर्क साधा। उन्होंने 5 सितम्बर को ग्वालपाड़ा के साहपुर गांव में संजीव सिंह और पूरे परिवार के फंसे होने की सूचना दी थी। 6 सितम्बर को सेना के जवानों ने उनके पूर परिवार को सुरक्षित निकाल लिया। अपने परिवार के सकुशल नवगछिया पहुंचने पर उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ का धन्यवाद किया।ड्ढr ड्ढr नवगछिया से राजेश कुमार ने डेस्क को बताया कि छातापुर के डहरिया से रंजन पाण्डेय, सुरन्द्र पाण्डेय सहित 25-30 लोगों को सेना ने निकाल लिया है। इसके लिए उन्होंने ‘हिन्दुस्तान’ को धन्यवाद दिया।ड्ढr दूसरी ओर ऐसे लोगों के भी फोन आए जिनके परिजन या तो बाढ़ में अब भी फंसे हैं या फिर उन्हें राहत चाहिए। उनकी सूचनाएं अविलंब संबंधित जिलों के कंट्रोल रूम तक पहुंचायी गयीं और कंट्रोल रूम ने भी तत्काल वायरलेस पर डेस्क की सूचना को फ्लैश करने की बात कही। बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए आग आ रहे कई लोगों ने भी डेस्क से संपर्क साधा। कर्णेशु दिल्ली से यह जानना चाहते थे कि राहत कोष में राशि राहत का सामान देने की क्या प्रक्रिया है। उन्हें और ऐसे दूसर कॉलरों को भी पूरी जानकारी उपलब्ध करायी गयी। इसके अलावा पटना, छपरा, रांची और दूसर जिलों से भी लोगों ने डेस्क से सनपर्क कर यह बाढ़पीड़ितों की मदद करने की बात कही और जानकारियां ली।

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