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प्रधानमंत्री को पहलवान होने की जरूरत नहीं: प्रणव

विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री बनने के लिए व्यक्ित को पहलवान होने की जरूरत नहीं है बल्कि उसे ऐसा सुलझा हुआ राजनेता होना चाहिए जो पूरी दुनिया को अपने विचारों से प्रभावित कर सके। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि प्रधानमंत्री को पहलवान की तरह मजबूत मांसपेशियांे वाला होना चाहिए और न ही उसे बडबोला होना चाहिए। मुखर्जी बुधवार को कोलकाता में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में डॉ. मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री बताने के भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण आडवाणी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के कुशल नेतृत्व का ही असर था कि मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान झुका और उसने पहली बार स्वीकार किया कि हमलों में शामिल लोग पाकिस्तानी नागरिक थे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पर आतंकवाद से लड़ने में असफल रहने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इसी सरकार के कार्यकाल में सीमा पर सैनिकों की तैनाती के छह सात माह के दौरान करोडों रुपए खर्च हुए लेकिन स्थिति ‘खोदा पहाड़ और निकली चुहिया’ वाली रही। सीमा को चौकस बनाने के बड़े बड़े दावे करने वाली सरकार के कार्यकाल में ही संसद पर हमला हुआ। उन्होंने कहा कि सीमाआें को चाक चौबंद रखने की बात कहने वाली राजग सरकार के कार्यकाल में ही सीमावर्ती जिलों में बारूदी सुरंग इस तरह बिछा दी गई थी कि बाद में अपने खेतों में काम करने के लिए जाने वाले असंख्य किसानों को इसकी वजह से जान गंवानी पड़ी। मुखर्जी ने कहा कि आम चुनाव में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की संभावना बहुत कम है लेकिन ऐसी स्थिति में कांग्रेस वाम दलों का समर्थन लेने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि शायद इसकी जरूरत ही नहीं पड़ेगी लेकिन यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस सरकार बनाने के लिए वाम दलों का समर्थन लेगी। गौरतलब है कि करीब एक सप्ताह पहले माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने कहा था कि उनकी पार्टी चुनाव बाद कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव से पहले उम्मीदवाद घोषित करने के सवाल पर मुखर्जी ने वाम नेतृत्व वाले तीसरे मोर्चे का मजाक उड़ाया और कहा कि मोर्चा जनभावनाआें के अनुकूल अपना नेता घोषित करने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सहित सभी बड़ी पार्टियां चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवाद की घोषणा करती रही है। कांग्रेस में तो यह लंबी परंपरा का हिस्सा है और पार्टी ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हाराव तथा सोनिया गांधी और अब मनमोहन सिंह को अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार चुनाव से पहले ही घोषित किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ 1े चुनाव में ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के कारण इस पद के लिए कोई उम्मीदवार घोषित नहीं कर सकी थी। यह स्थिति भी इसलिए आई कि ऐसी कठिन घड़ी में सोनिया गांधी के समक्ष इस मुद्दे पर विचार करना कठिन था।

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