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न्यूक्िलयर एनर्जी के बाजार पर नजर

भारत के एटमी डील पर शामिल होने के साथ ही भेल ने न्यूक्िलयर पावर प्लांट के उपकरणों के निर्माण का कार्यादेश लेने की योजना तैयार कर ली थी। इसके लिए भेल ने एचइसी में संभावनाएं तलाशी और बात बन गयी। इसका प्रस्ताव दोनों कंपनियों ने तैयार किया और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसकी मंजूरी दे दी। मिली जानकारी के अनुसार भारत से परमाणु प्रतिबंध हटने के साथ ही अब यह न्यूक्िलयर पावर के लिए विश्व बाजार में व्यवसाय कर सकता है। आनेवाला समय न्यूक्िलयर पावर का है। 15 साल में करीब 1200 अरब रुपये का कारोबार होने की संभावना है। 2030 तक 63000 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन होगा। इस कारण कई निजी कंपनियां भी अपने स्तर से तैयारी कर रहीं हैं। इसमें एलएंडटी भी है। एलएंडटी ने भी एचइसी से इसके लिए बात की थी। न्यूक्िलयर पावर प्लांट में सबसे बड़ी जरूरत ताप घरों में लगने वाले उपकरणों की कास्टिंग और फोरिग की होगी। भेल के पास पहले से ही काफी कार्यादेश हैं। यह काम उसके हरिद्वार स्थित एक यूनिट में होता है, लेकिन वह बहुत हद तक आयात पर निर्भर था। एचइसी के पास कोई भी मशीन बनाने की आधारभूत संरचना है। एचइसी न्यूक्िलयर क्षेत्र में कई काम कर चुका है। न्यूक्िलयर रिएक्टर के उपकरण भी इसने बनाये हैं। इसी कारण निजी कंपनियों से मुकाबला करने के लिए भेल और एचइसी ने ज्वाइंट वेंचर बनाने का निर्णय लिया। इससे दोनों कंपनियों को लाभ होगा। विदेशी कंपनियों को रोकने की तैयारी : एचइसी और भेल की संयुक्त उपक्रम कंपनी बनाने के लिए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव टीके नायर एवं भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव एसएन दास ने पहल की थी। न्यूक्िलयर पावर के उपकरण बनाने के लिए भारत की कंपनियों के साथ चीनी, कोरिया, इंग्लैंड और ऑस्ट्रिेलिया की कंपनियां संभावना तलाश कर रही थीं। तभी नायर ने कहा कि हम पब्लिक-पब्लिक पार्टनरशिप में ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए पहल भी शुरू हुई। सबसे पहले भेल ने विशाखापत्तनम स्थित भारत हेवी प्लेट्स एवं वेसेल्स (बीएचपीवी) के साथ नयी कंपनी बनायी। इसके बाद एनटीपीसी एवं भेल पावर प्रोजेक्ट बना। तीसरी कंपनी एचइसी-भेल की बन रही है। चिकित्सकों को नहीं मिला पंचम वेतनमान : एचइसी के सेंट्रल डीए वाले चिकित्सकों को अब तक पंचम वेतनमान नहीं मिला है, जबकि केंद्र सरकार ने छठा वेतमान भी लागू कर दिया है। आइएमए धुर्वा शाख्रा के अध्यक्ष डॉ ओपी सिंह ने सीएमडी जीके पिल्लई से पंचम वेतनमान लागू करने की मांग की है। इस संबंध में आइएमए का प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही सीएमडी से मिलेगा।मंत्री को ज्ञापन : हटिया प्रोजेक्ट मजदूर संघ ने एचइसी में आरक्षण नियमों का पालन कराने की मांग की है। इसके लिए संघ ने भारी उद्योग मंत्री संतोष मोहन देव को ज्ञापन दिया है।ड्ढr ठेका श्रमिकों नेज्ञापन दिया : एचइसी के ठेका-सप्लाई श्रमिकों ने सेवा स्थायी करने के लिए भारी उद्योग मंत्री को ज्ञापन दिया है। विस्थापितों ने विरोध जताया : एचइसी विस्थापित क्रांतिकारी समिति ने एचइसी के पुनरुद्धार पैकेा एवं भेल के साथ ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनने का स्वागत किया है। पैकेा में जमीन को जोड़ने का विरोध किया है। समिति के प्रवक्ता विश्वजीत शाहदेव ने कहा कि जमीन का मामला सुप्रीम एवं हाइकोर्ट में लंबित है। ऐसी स्थिति में पैकेा में जमीन को जोड़ना उचित नहीं है।ो एरियर मांगा : एचइसी टेक्िनकल कामगार यूनियन ने एचइसी प्रबंधन से 1.1.से बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग की है। यूनियन की सात सितंबर को हुई बैठक में कह गया कि रोल के कामगारों को इसका भुगतान शीघ्र होना चाहिए।रिटायर्ड कर्मियों ने पूजा के पूर्व मांगा एरियर : एचइसी के रिटायर्ड कर्मियों ने प्रबंधन से दुर्गापूजा के पूर्व बकाया एरियर भुगतान करने की मांग की है। पूर्व कर्मचारियों के दो संगठनों की अलग-अलग हुई बैठक में यह मांग की गयी। बैठक में कहा गया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के पैकेा की घोषणा से पूर्व कर्मचारियों के चेहर पर खुशी दिख रही है। पहले 1े एरियर का भुगतान होना चाहिए। एटक-सीटू की सभा 10 को : लाभांश बोनस एवं सीपीएफ में 12 प्रतिशत कटौती की मांग को लेकर एटक-सीटू 10 सितंबर को एचइसी मुख्यालय के समक्ष सभा करगी। सभा के माध्यम से प्रबंधन से लाभांश बोनस देने की मांग की जायेगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए एटक के लालदेव सिंह ने बताया कि एचइसी अब लाभ कमा रहा है। इस कारण लाभांश बोनस कामगारों का हक बनता है। इसी प्रकार सीपीएफ में अब 10 की जगह 12 प्रतिशत की कटौती होनी चाहिए। बकाया भुगतान की मांग : एचइसी के रिटायर्ड एवं वर्तमान कर्मियों की बैठक लालदेव साह की अध्यक्षता में शहीद मैदान में हुई। इसमें कहा गया कि कोर्ट के आदेश पर एक रुपये वेतन वृद्धि की त्रुटि दूर की गयी और इसका भुगतान कुछ लोगों को किया गया। अन्य प्रभावितों को भी इसका भुगतान करना चाहिए। इसी मुद्दे पर अगली बैठक 15 सितंबर को बुलायी गयी है। यह जानकारी लालदेव साहू ने दी है।ड्ढr भुला दिये गये एचइसी को पटरी पर लाने वाले एस विश्वासड्ढr भेल-एचइसी के एमओयू के लिए आयोजित समारोह में एचइसी के स्वर्णिम और दुर्दिन की चर्चा हुई, लेकिन जिस व्यक्ित ने एचइसी को बंदी के चौखट से बाहर निकाला, उसे भुला दिया गया। यहां बात एचइसी के कार्मिक निदेशक एवं कार्यवाहक सीएमडी एस विश्वास की हो रही है। एस विश्वास जब एचइसी के कार्मिक निदेशक बन कर आये थे, तो इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि एचइसी बंद हो जायेगा। वह खाद कारखाना सिंदरी से आये थे और उनके कार्यकाल में ही फैक्ट्री बंद हो गयी थी। एस विश्वास तक भी यह बात पहुंची थी और वह कई समारोह में भी इसका जिक्र किया करते थे। उन्होंने कहा कि वह पहले कामगारों का विश्वास जीतेंगे। फिर काम कर दिखायेंगे। एस विश्वास ने एचइसी के डूब चुके रोड़ रुपये वसूले। इसके लिए उन्होंने दिल्ली जाकर दिन-रात एक किया। आठ माह से पीछे चल रहे कामगारों का वेतन 14 साल बाद नियमित किया। एचइसी में पहले सिर्फ रात को छह घंटे बिजली रहती थी। 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए सरकार के पास और कोर्ट गये। कोर्ट ने 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने का निर्देश दिया। विश्वास के नेतृत्व में ही 18 साल बाद एचइसी ने 2006 में मुनाफा कमाया। इसके बाद उन्होंने कामगारों के पे रिवीजन के लिए समझौता किया। सात सितंबर के समारोह में कई अधिकारियों, नेताओं की चर्चा हुई, लेकिन एस विश्वास भुला दिये गये। कामगारों का कहना था कि विश्वास साहब जो कर गये, वह दूसरा नहीं कर सकता।ं

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