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राजरंग

हिंगलिश पढ़े बगैर आदमी तरक्की नहीं कर सकता है। हिन्दी जानो न जानो, हिंगलिश जरूर जानो। तरक्की का यही एकमात्र रास्ता है। जो हिंगलिश पढ़ लिया, समझ लिया और बोल लिया उसको कोई टाइप का प्रॉब्लम नय होगा। बुझिये कि वह तरक्की कर लिया। इसलिए बच्चों तुमलोगों को हिंगलिश पढ़ना ही होगा। इ बात हम नय बोल रहे हैं, इ तो स्टेट के एडुकेशन देखनेवाले मिनिस्टर साहेब बोल रहे हैं। देश-दुनिया को देखने के बाद यही बात समझ में आती है। अपने मिनिस्टर साहेब चाहते हैं कि देश के साथ-साथ अपना स्टेट भी डेवलप कर। इ बतवा टीचर लोग बुझबे नय करता है। अर ब्रदर, हिन्दी पढ़ा-पढ़ाकर काहे ले चिल्ड्रेन लोगों को डल बना रहे हो। हिंगलिश बोलनेवालों को देखते नय हो, कइसा टनाटन बोलता है और सबकोई देखते रह जाता है। अब एतना बतवा तो कोइयो बुझेगा। खैर, हम तो भाई अपने मिनिस्टर साहेब का सपोर्ट करंगे। हमलोग तो हिन्दी पढ़-पढ॥कर मैट्रिक पास किये। आइए-बीए भी किये। लेकिन हिंगलिश ठीक से नय पढ़ सके तबे तो झारखंड में लटकल हैं। हिंगलिश पढ़ल-लिखल रहते, तो दिल्ली-ढाका में नौकरी नय करते। इसलिए माइ डियर चाइल्डो, तुमलोग इ गलती नय करो। हिंगलिश अभिये से पढ़ो तबे झारखंड तरक्की करगा और तुमलोग भी तरक्की करोगे। अंडरस्टैंड कि नॉट?

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