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सिंगुर में ही बनेगी नैनो

आखिर रविवार देर रात राजभवन से खबर आ ही गयी कि सिंगुर मसले का समाधान निकल आया। शाम को भी एसी ही खबर उड़ी, लेकिन फिर यह सूचना मिलने पर खबरनवीस उलटे पैर राजभवन दौड़े कि तृणमूल नेता ममता बनर्जी को राज्यपाल गोपाल कृष्ण गांधी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ हुए समझौते में यकायक कुछ कमी नजर आ गयी है और मामला उलझ गया है। राजभवन से शाम को राहत की सांस लेकर लौटे सीएम बुद्धदेव को भी दोबारा लौटना पड़ा। आखिर देर रात राजभवन के प्रांगण में राज्यपाल ने यह ऐलान किया कि सिंगुर विवाद सुलझा लिया गया है। गांधी के मुताबिक यह फैसला किया गया है कि सिंगुर के जिन किसानों से टाटा प्लांट के लिए जमीन ली गयी थी उसके बदले उन्हें अन्यत्र जमीन दी जायेगी। इसके लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनेगी जो एक हफ्ते में रिपोर्ट देगी। रिपोर्ट आने तक सिंगुर काम बंद रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी ने सिंगुर से अपना धरना समाप्त करने की बात मान ली है। राज्यपाल की पहल पर बुद्धदेव अपने आठ साल के कार्यकाल में पहली बार ममता बनर्जी के साथ बातचीत के लिए बैठे। इसमें वह सिंगुर के अनिच्छुक किसानों की कुछ जमीन वापस करने पर राजी हो गये। इसके अलावा जमीन देनेवाले किसानों के लिए समुचित आर्थिक पुनर्वास पैकेा बनाने के लिए भी सरकार ने एक कमेटी के गठन की बात मान ली। बैठक समाप्त होने पर ममता ने इसे अपनी नैतिक जीत करार दिया। सिंगुर में टाटा की कार के लिए अधिगृहीत जमीन वापस करने की मांग को लेकर ममता 24 अगस्त को सिंगुर में धरने पर बैठ गयी थीं। मुख्यमंत्री ने उनके साथ बैठक की पेशकश की तो ममता ने कहा था कि वह उन पर विश्वास नहीं कर सकती।इसके बाद बीते रविवार राज्यपाल ने पत्र लिखकर ममता को राजभवन आकर बैठक करने का निमंत्रण दिया।

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