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ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनाने में लगेगा तीन माह

एचइसी और भेल की ज्वाइंट वेंचर कंपनी बनने में तीन माह का समय लगेगा। कंपनी के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। सबसे पहले सर्च कमेटी बनायी जायेगी। इसमें दोनों कंपनियों के अधिकारी शामिल होंगे। कंपनी में एक सीइओ की नियुक्ित की जायेगी। इसका चयन सर्च कमेटी करगी।ड्ढr मिली जानकारी के अनुसार शीघ्र ही सभी मुद्दे तय कर लिये जायेंगे। कंपनी में एक चेयरमैन भी होगा। इस पद पर दोनों कंपनी के सीएमडी एक- एक साल काम करंगे। पहले चेयरमैन जीके पिल्लई होंगे। कंपनी का प्रशासन व प्रबंधन एचइसी के पास ही रहेगा। दोनों कंपनियां 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदार होंगी। एचइसी की जमीन, प्लांट और मशीन को इक्िवटी माना जायेगा और भेल इसी के बराबर निवेश करगा। इसके अलावा प्लांटों की मशीनों के आधुनिकीकरण और नयी मशीन लगाने में भी भेल निवेश करगा। प्लांट के आधुनिकीकरण पर 120 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है। एंसिलरियों के दिन भी बहुरंगे रांची। एचइसी को पैकेा मिलने के बाद अब इस क्षेत्र की एंसिलरियों के भी दिन फिरनेवाले हैं। एचइसी के पास फिलहाल 3500 करोड़ का कार्यादेश है। भेल से एमओयू होने के बाद इसके कार्यादेश में और इजाफा होगा। ऐसी स्थिति में एचइसी को भी एंसिलरियों की जरूरत होगी। प्रबंधन एंसिलरियों से काम कराने पर विचार कर रहा है।ड्ढr तुपुदाना क्षेत्र में एक समय करीब दो सौ एंसिलरियां थीं। एचइसी के साथ-साथ इनकी भी हालत खराब होती गयी। एचइसी तो बंद होने से बच गया, लेकिन एंसलरियां सरवाइव नहीं कर सकीं। कई एंसलरियां बंद हो गयीं। लेकिन अब उनके दिन भी बहुरनेवाले हैं। एचइसी के सीएमडी जीके पिल्लई के अनुसार जब एचइसी प्रगति करगा, तो स्वाभाविक है कि एंसिलरियों को भी लाभ होगा। प्रबंधन पहले से ही एंसलरियों को कार्यादेश देने पर विचार कर रहा है। एचइसी के पास अब कार्यादेश की कमी नहीं है। पैकेा मंजूर होने और कार्यशील पूंजी मिलने के बाद काम तेजी से होगा। प्रबंधन को भी एंसिलरियों की जरूरत होगी। इस कारण एचइसी उन्हें सहयोग करने से पीछे नहीं हटेगा। इसके लिए अब उन्हें भी पहल करनी होगी।

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