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नवल नहीं बन सकेगा डॉक्टर

अब नवल नहीं बन सकेगा डाक्टर। परिवार को पेट चलना कठिन है पढ़ाई का खर्च कैसे उठायेंगे। सुगनी देवी की बिटिया की शादी कैसे होगी। पाई-पाई जोड़ कर बिटिया की शादी के लिए रखे गये रुपए, कपड़े, वर्तन, जेवरात आदि पानी में बह गये। तीन बकरियां थीं वह भी नहीं बचीं। बाढ़ ग्रस्त जिलों में इस तरह के परिवारों की संख्या सैकड़ों में है।ड्ढr ड्ढr कोसी के प्रलय ने लोगों का घर-वार तो छिना ही सपनों को भी चकनाचूर कर दिया। बच्चों को इांीनियर व डाक्टर बनाने की तमन्ना दफन हो गई। बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो गया। सुपौल, मधेपुरा व अररिया आदि बाढ़ प्रभापित जिलों के कई बच्चे बिहार से बाहर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनके माता-पिता किसान हैं। पेटकाट कर बड़ी मुश्किल से बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए भेजा था लेकिन अब पढ़ाई का खर्च चलाना उनके बस में नहीं है। ऐसे में कई लोगों ने अपने बच्चों को वापस बुलाने का फैसला किया है।ड्ढr ड्ढr मधेपुरा के चंद्रकिशोर का भाई नवल किशोर भारती मेडिकल प्रवेश प्ररीक्षा की तैयारी करने पिछले ही वर्ष कोटा गया है। नामांकन के समय डेढ़ लाख रुपए संस्थान को भुगतान किया था। प्रति महीने तीन हाार रुपए खर्च के लिए भेजना पड़ता है। चंद्रकिशोर ने बताया कि खेती और पशुधन ही जीविका का एक मात्र साधन है। इन्हीं साधनों के सहार भाई को पढ़ने भेजा था लेकिन अब वापस बुलाने के सिवा दूसरा चारा नहीं है। खेती करने के लिए न खेत बचे हैं और न ही संसाधन।ड्ढr सुगनी देवी अपनी बिटियाा की शादी के लिए चिंतित है। उसने बताया कि अगले साल बिटिया के हाथ पीले करने थे लेकिन अब यह कैसे होगा पता नहीं। सबों के सभी लोगों की स्थिति एक समान है। र्का भी नहीं मिलेगा।ड्ढr मधेपुरा जिले के मुकेश कुमार, सुपौल जिले की सुषमा देवी, पुष्पा देवी ने बताया कि बच्चों को अब बाहर पढ़ाना संभव नहीं रहा।

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