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करार ला सकता है यूरेनियम के दामों में तेजी

विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) द्वारा भारत से वैश्विक परमाणु व्यापार पर लगे प्रतिबंध हटाए जाने से यूरेनियम के दामों में तेजी आने की सम्भावना है। भारत के परमाणु रिएक्टर ईंधन की कमी की वजह से इस समय अपनी 50 प्रतिशत क्षमता से ही काम कर रहे हैं। अगले 15 साल में अपने परमाणु रिएक्टरों की संख्या को दोगुना करने की भारत की योजना के मद्देनजर आने वाले वषर्ों में उसके बाजार में यूरेनियम की मांग में बढ़ोत्तरी का प्रमुख माध्यम बनकर उभरने की उम्मीद है। इस समय सिर्फ रूस ही भारत को यूरेनियम की आपूर्ति कर रहा है। गौरतलब है कि एनएसजी ने शनिवार को भारत से वैश्विक परमाणु व्यापार करने पर लगा प्रतिबंध अमेरिकी प्रस्ताव को मंजूर करते हुए हटा लिया था। इसके साथ ही परमाणु व्यापार के मामले में भारत का 34 साल पुराना वनवास भी खत्म हो गया था। एक यूरेनियम व्यवसाई का कहना है कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते पर अमेरिकी कांग्रेस की मुहर लगने के बाद भारत यूरेनियम के प्रत्यक्ष बाजार पर नजर दौड़ना शुरु करेगा और फिर उसकी कोशिश जल्द से जल्द दीर्घकालीन समझौते करने की होगी। व्यवसाई के मुताबिक लोगों का मानना है कि 2030 लाख पाउंड यूरेनियम की खरीद की जाएगी। यह मात्रा इसकी कीमत में बढ़ोत्तरी के लिए काफी होगी। द कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री का कहना है कि अगले 15 वषर्ों में 1820 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में 27 अरब डॉलर का निवेश किए जाने की सम्भावना है। भारत वर्ष 2050 तक अपने कुल विद्युत उत्पादन का 25 फीसदी हिस्सा परमाणु ऊर्जा से हासिल करना चाहता है। इस समय उसके छह रिएक्टर निर्माणाधीन हैं जिनके वर्ष 2010 तक तैयार हो जाने की उम्मीद है। एक अन्य यूरेनियम व्यवसाई ने कहा कि प्रत्यक्ष बाजार में अब भी काफी माल बचा है मगर भारत मध्यम और दीर्घकालीन समझौते के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उधर बीएमआे कैपिटल मार्केट्स के विश्लेषक जेमी स्ट्रॉस ने कहा कि भारत को वैश्विक परमाणु कारोबार की इजाजत मिलने के बाद यूरेनियम की मांग में तेजी आने की सम्भावना है मगर वे हालात वर्ष 2012 से पहले नहीं बनेंगे।

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  • Web Title: करार ला सकता है यूरेनियम के दामों में तेजी