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बेलगाम उन्माद

फिल्म अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन के वक्तव्य पर राज ठाकर की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बवाल में नया कुछ नहीं है। राज ठाकर पहले भी ऐसे ही बवाल खड़े करते रहे हैं। बल्कि यह अंदाज और भी पुराना है। बाल ठाकर आज से तीस-चालीस साल पहले यही राजनीति करके आगे बढ़े थे। अब चूंकि शिवसेना जरा गंभीर और व्यापक राजनीति करने वाला संगठन बनना या कम से कम दिखाना चाहती है इसलिए राज ठाकर ज्यादा उग्र और संकीर्ण मराठीवाद की राजनीति करके अपनी जगह बनाना चाहते हैं। राज ठाकर वही कर रहे हैं जो उन्होंने अपने चाचा ठाकर से सीखा है, लेकिन यह साफ समझ में आता है कि महाराष्ट्र में राज कर रहे कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इतिहास से कुछ नहीं सीखा। बाल ठाकर को भी तत्कालीन कांग्रेसी नेताओं ने मुंबई के कम्युनिस्ट-समाजवादी नेतृत्व का मुकाबला करने के लिए प्रोत्साहित किया था और फिर वे इतने बड़े बन गए कि कांग्रेस के लिए चुनौती बन गए। आज कांग्रेस-राकांपा नेताओं को लग रहा है कि राज ठाकर को उनकी हैसियत से बड़ा बना कर वे बाल ठाकर के लिए चुनौती पेश कर रहे हैं। इसलिए तमाम बवालों के बावजूद राज ठाकर और उनकी उपद्रवी सेना के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अगर राजनीति की बात छोड़ भी दी जाए तो महाराष्ट्र सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने और नागरिकों को सुरक्षा देने के अपने काम में बुरी तरह विफल हुई है। अगर कुछ मुट्ठीभर लोग देश की आर्थिक राजधानी को अपनी मर्जी से बंधक बना सकते हैं तो यह सरकार के लिए कोई गौरव की बात नहीं है। यह गौरतलब है कि महाराष्ट्र किसी जमाने में आर्थिक मोर्चे पर निरपवाद नंबर एक राज्य था आज उसे चुनौती देने वाले कई राज्य हो गए हैं। नए आर्थिक निजाम में अगर महाराष्ट्र को आगे बने रहना है तो इस किस्म की संकीर्ण राजनीति से बाज आना होगा। जया बच्चन के हिंदी बोलने न बोलने या माफी मांगने से महाराष्ट्र का गौरव जुड़ा हुआ नहीं है, वह राज ठाकर जसों की संकीर्ण राजनीति और महाराष्ट्र सरकार की निष्क्रियता से जरूर कम होता है।

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  • Web Title: बेलगाम उन्माद