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अभी दो साल डटा रहूंगा : गांगुली

ईरानी ट्रॉफी के लिए यचनकर्ताओं की उपेक्षा का शिकार होने के बावजूद पूर्व भारतीय कप्तान सौरभ गांगुली के कदम डगमगाए नहीं हैं और उनका इरादा अभी दो वर्ष तक क्रिकेट के मैदान में डटे रहने का है। गांगुली ने द सन से कहा मेरा मानना है कि मेरे पास अभी दो वर्ष बचे हैं। आप प्रतिष्ठा के साथ खेल से हटना चाहते हैं, न कि लोगों द्वारा आपकी क्षमता पर उंगली उठाए जाने पर। पूर्व कप्तान हालांकि यह मानते हैं कि वनडे टीम में स्थान पाना अब उनके लिए मुश्किल हैं लेकिन वह टेस्ट टीम में अपना स्थान बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होने कहा मैं वनडे मैचों की कमी महसूस करता हूं लेकिन हम सीनियर खिलाड़ी इस बात को समझते हैं कि हम 2011 के विश्व कप में नहीं खेल पाएंगे। इसलिए अब युवा खिलाड़ियों के लिए समय है कि वे मैच अनुभव हासिल करें। गांगुली ने साथ ही कहा हालांकि इस समय में टैस्ट क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग में 20-20 खेल रहा हूं। श्रीलंका दौरे में भारतीय बल्लेबाजों के लिए सिरदर्द साबित हुए रहस्यमई स्पिनर अजंता मेंन्डिस के लिए गांगुंली ने कहा, वह बड़ा ही सटीक गेंदबाज हैं और दूसरे छोर पर मुथैया मुरलीधरन के होने से बल्लेबाज की परेशानी दोगुनी हो जाती है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि लंबी दौड़ में मेंडिस कितना चल पाएंगे। लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं कि श्रीलंका को एक शानदार गेंदबाज मिल गया है। बाएं हाथ के बल्लेबाज गांगुली ने 2003 विश्व कप के फाइनल में पहुचने और ऑस्ट्रेलिया को घरेलू सीरीा में हराने को अपने करियर का सबसे यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा, मेरे करियर की कई सुनहरी यादें हैं। 2003 के विश्व कप के फाइनल में पहुंचना पाक को उसी की जमीन पर हराना ऑस्ट्रेलिया में कप्तान के तौर पर अच्छा प्रदर्शन करना और उन्हें 2001 में भारत में हराना तथा पिछले वर्ष इग्लैंड में टेस्ट सीरीा जीतना महत्वपूर्ण रहे हैं। पूर्व कप्तान ने कहा, मेरे लिए टीम महत्वपूर्ण है। हार में शतक भी बेकार हैं जबकि जीत में अर्धशतक का महत्व ज्यादा हो जाता है।

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