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घाटी के घाव पर मरहम लगाने की तैयारी

पहले जम्मू के अवाम के मन-माफिक अमरनाथ भूमि विवाद का हल निकालने के बाद अब केन्द्र सरकार घाटी के घावों पर मरहम लगाने की तैयार कर रही है। सरकार सेब व्यापारियों को हुए नुकसान की भरपाई का ऐलान इसी माह कर सकती है। सेब व्यापारियों का कहना है कि आंदोलन के कारण उन्हें भारी नुकसान हुआ। इनके नुकसान का आकलन करने के लिए बनी राज्य के मुख्य सचिव एसएस कपूर की अगुवाई वाली कमेटी इनके लिए करीब 500 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेा की सिफारिश कर सकती है। कपूर साहब इस मसले पर केन्द्रीय गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ तफसील से बात करने के लिए अगले कुछ दिनों में राजधानी में आने वाले हैं। इस बीच, केन्द्र सरकार नियंत्रण रखा के दोनों तरफ यानी श्रीनगर-मुजफ्फराबाद और पूंछ-रावलकोट के बीच व्यापारिक संबंध शुरू करने पर गम्भीरता से विचार कर रही है। एक शीर्ष सूत्र का कहना है कि केन्द्र सरकार की एक टीम एलओसी के आरपार व्यापारिक रिश्तों की संभावनाओं का पता लगाने के लिए विगत शनिवार- रविवार को घाटी में थी। इसने एसएस कपूर और कुछ अन्य प्रमुख अधिकारियों से भी भेंट की। कपूर ने हाल ही में कहा भी था कि केन्द्र सरकार नियंत्रण रखा के उस पार से व्यापारियों के जत्थे की मेजबानी करने के लिए तैयार है। महत्वपूर्ण है कि अलगाववादी हुर्रियत, पीडीपी के साथ-साथ नेशनल कांफ्रेस भी सीमा के आरपार व्यापारिक संबंधों को चालू करने की हिमायती रही है। पिछले दिनों जब कश्मीरी व्यापारियों ने जम्मू के आंदोलकारियों पर आर्थिक नाकेबंदी का आरोप लगाया था तब नेशनल कांफ्रेस के नेता उमर अब्दुल्ला ने भी मांग की थी कि कश्मीरी व्यापारियों को सीमा के उस पार अपने माल को बेचने की अनुमति दी जाए। इस बीच,राजधानी में मंगलवार को कश्मीर में शांति की बहाली के लिए सक्रिय वायस ऑफ हारमनी नाम के संगठन की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए घाटी के एक सेब व्यापारी मोहम्मद इलियास ने कहा कि यदि नियंत्रण रेखा के बीच व्यापारिक संबंध शुरू हुए तो घाटी के अवाम की एक पुरानी मांग पूरी हो जाएगी।

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