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केहि विधि रचा ब्रह्माण्ड हमारा

दुनिया के प्रमुख भौतिकविद आा फ्रांस-स्विटारलैंड सीमा के निकट सतह से 100 मीटर गहर स्थापित एक महामशीन में विज्ञान के इतिहास का सबसे बड़ा प्रयोग शुरू करंगे। इस प्रयोग केोरिए उन्हें उम्मीद है कि वे ब्रह्मांड में पदार्थ केोन्म और उसके बाद सम्पन्न तमाम प्रक्रियाओं सेोुड़ी गुत्थियों को खोल सकेंगे।ड्ढr लरा हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) नाम की यह महामशीन असंख्य नाभिकीय कणों (ौसे प्रोटॉन) को लगभग प्रकाश की गति से 27 किमी लंबी सुरंग में दौड़ा कर उनकी टक्कर कराएगी। लाखों कंप्यूटरों की आखें इन टकराहटों पर लगी होंगी और वहांोो कुछ घटेगा, उसे सेकेंड के करोडंवें हिस्से तक रिकॉर्ड कियाोाएगा।ोूरा पहाड़ियों की घाटी में बनी विश्वविख्यात सर्न प्रयोगशाला में डटे वैज्ञानिक इस महाप्रयोग केोरिए ब्रह्मांड केोन्म की उन अनसुलझी अवधारणाओं को परखेंगे,ोिन्हें अब तक ‘डार्क मैटर’, ‘डार्क इनर्ाी’, एक और डाइमेंशन या वैज्ञानिक बिरादरी के बीच सबसे चर्चितोुमले ‘हिग्स बोसॉन’ व ‘गॉड पार्टिकिल’ के नाम से पुकाराोाता रहा है। सर्न के फ्रेंच डायरक्टर रॉबर्ट आयमर कहते हैं, ‘एलएचसी का प्रयोग ब्रह्मांड के बार में हमार नारिए को उलट सकता है।’ड्ढr इस बीच सर्न के वैज्ञानिक इस प्रयोग से बार में फैली उन बेसिरपैर की अफवाहों को दूर करने की भीोी-तोड़ कोशिश कर रहे हैं,ोिनके मुताबिक नाभिकीय कणों की भीषणड्ढr टक्कर से तीव्र गुरुत्वाकर्षण वाले छोटे-छोटे ब्लैक होल बनोाएंगे,ोो पूरी दुनिया को निगल सकते हैं। इन अफवाहों को एकोर्मन रसायनशास्त्री प्रो. ऑट्टो रोसलर की आशंकाओं नेोन्म दिया है। वैज्ञानिकों ने ‘प्रलय’ की अफवाहों को वाहियात और कुछ लोगों का षडयंत्र बताते हुए कहा कि प्रयोग को पूरी तरह सुरक्षित बताया है।ड्ढr दरअसल, एलएचसी महाप्रयोग केोरिए वैज्ञानिक 15 अरब वर्ष पहले हुई उस ब्रह्मांडीय घटना को प्रयोगशाला में दोहराना चाहते हैं,ोिसे विज्ञान की दुनिया में ‘बिग बेंग’ के नाम सेोानाोाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक एक छोटे से सिक्के के आकार के अति सघन ऊरापुां का महा विस्फोट धरती, सूर्य, ग्रह, हमार सम्पूर्ण ब्रह्मांड और अंतत:ोीवन केोन्म का आधार बना। नौ अरब डालर की लागत से होने वाले इस प्रयोग पर दुनिया की निगाहें हैं। हालांकि सर्न वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है किोरूरी नहीं उन्हें पहली ही बार में पूरी सफलता मिलोाए। उन्होंने कहा कि पूरी क्षमता की टकराहटें तो एक साल बाद ही शुरू हो पाएंगी। खरबों प्रोटॉन कण विपरीत दिशा में एक-दूसर से टकराएँगेड्ढr इन कणों की रफ्तार प्रकाश की गति से थोड़ी ही कम होगीड्ढr एक सेकेंड में 27 किलोमीटर लंबी एलएचसी के लगाएँगे 11245 चक्करड्ढr हर एक प्रोटॉन कण की ऊरा होगी 70 खरब इलेक्ट्रॉन वोल्टड्ढr टक्कर के बाद ऊरा होगी 140 खरब इलेक्ट्रॉन वोल्टड्ढr महामशीन में सूर्य के मध्य से भी एक लाख गुना यादा होगा तापमानड्ढr छोटे ब्लैक होल भी बनने की संभावना द्रवीकृत नाइट्रोन और हीलियम से भीतर का तापमान रखाोाएगा कमड्ढr प्रयोग के दौरान तापमान रहेगा शून्य से 271 डिग्री कमड्ढr यह तापमान बाहरी अंतरिक्ष के तापमान से भी कम हैड्ढr प्रयोगकर्ताओं के मुताबिक ब्लैक होल से कोई खतरा नहींड्ढr एक सेकेंड के कई अरबवें हिस्से में ये होोाएँगे नष्ट

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