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‘बातचीत के महत्व को समझ नहीं सका रॉ’

पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल वी.पी.मलिक ने रहस्योद्घाटन किया है कि देश का खुफिया तंत्र पाकिस्तानी सेना की कारगुजारियों से अनभिज्ञ होने के कारण महत्वपूर्ण सूचनाएं भी सेना को उपलब्ध कराने में कोताही बरत जाता है। इस संदर्भ में करगिल युद्ध के दौरान जनरल परवेज मुशर्रफ और उनके चीफ ऑफ जनरल स्टाफ ले.जनरल मोहम्मद अजीज खान के बीच चीन से फोन पर हुई वार्ता की रिकार्डिग का जिक्र किया। जनरल मलिक ने कहा, खुफिया एजेंसी रॉ के पास उस बातचीत की रिकार्डिग थी लेकिन वह इसका महत्व नहीं समझ सका। यह तो अचानक और अनायास उनको इसकी जानकारी मिली। जब उन्होंने सूचना को देखा तो चौंके और कहा कि इतनी महत्वपूर्ण सूचना देश के थलसेनाध्यक्ष को क्यों नहीं दी गई। अगले दिन रक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में सभी ने कहा कि यह रिकार्डिग किसी जक पॉट से कम नहीं थी। लेकिन रॉ इस बात को समय पर समझ नहीं सकी। जनरल मलिक ने सवाल किया कि क्या इस तरह की सूचना का श्रेष्ठ विश्लेषण देश के जनरल के अलावा कोई और कर सकता है? आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा रॉ के एक पूर्व अधिकारी कर्नल आर.एस.एन. सिंह की पुस्तक ‘मिलिटरी फैक्टर इन पाकिस्तान’ के विमोचन के लिए आयोजिद समारोह में जनरल मलिक ने यह भी बताया कि उसी दौरान मुशर्रफ की एक और बातचीत रिकार्ड की गई थी जिसकी उन्हें कभी जानकारी नहीं दी गई। यह तो एक सुबह प्रधानमंत्री (वाजपेयी) ने तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र की मौजूदगी में उस बातचीत पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो मैंने पूछा, ‘कौन सी बातचीत’? समारोह में मौजूद थलसेना के एक और पूर्व अध्यक्ष जनरल वी.एन.शर्मा ने कहा कि मुशर्रफ की बातचीत की र्किाडिंग मीडिया को जारी नहीं की जानी चाहिए थी क्योंकि यह सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण थी। उन्होंने भी एक रहस्योद्घाटन किया कि सेना के खुफिया विभाग के पास उनके समकालीन पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक की बातचीत की रिकार्डिग थी लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। जनरल मलिक का मत था कि भारतीय नेताओं, मीडिया व नौकरशाहों को पाक सेना के बार में ज्यादा जानकारी न होना दुर्भाग्य की बात है। पाक को समझना है तो पाकिस्तानी सेना को पहले समझना जरूरी है। उनके मुताबिक जो लोग यह कहते हैं कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई दो अलग संस्थाएं हैं, वे गलत हैं। दरअसल आईएसआई पाक सेना का ही विस्तार है।ं

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