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किसानों के लिए बड़ी योजना बनाने में जुटा कृषि विभाग

बाढ़ प्रभावित जिलों में किसानों की टूटी कमर को सीधा करने के लिए कृषि विभाग एक बड़ी योजना बनाने में जुटा है। योजना के अनुसार भूमि को खेती योग्य बनाने के बाद किसानोें को मुफ्त में बीज तो दिया ही जायेगा, खाद के लिए भी उन्हें पैसे नहीं चुकाने होंगे। हालांकि योजना पर अभी विचार ही चल रहा है। लेकिन कृषि मंत्री नागमणि का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति मिलने पर इसके लिए केन्द्र के संबंधित मंत्रियों से बात की जायेगी।ड्ढr ड्ढr कृषि मंत्री का मानना है कि भूमि को खेती के योग्य बना भी दिया जाय तो किसानों के पास नई खेती के लिए पूंजी का अभाव अन्य घरलू सामग्री के साथ घर में रखे बीज भी बाढ़ की भेंट चढ़ चुके हैं। ऐसे में किसानों के सामने नई खेती शुरू करने की बड़ी समस्या होगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पीड़ितों को सिर्फ पानी से निकालकर उनकी किस्मत पर छोड़ने वाली नहीं हैं। बल्कि उनके जीवन को सहा बनाने तक सरकार हर कदम पर साथ रहेगी।ड्ढr ड्ढr भूमि को जल्द खेती योग्य बनाने की योजना बनीड्ढr पटना (हि. ब्यू.)। बाढ़ प्रभावित इलाके में भूमि को जल्द से जल्द खेती योग्य बनाने के लिए कृषि विभाग ने पूरी योजना बना ली है। पानी उतरते ही इसपर काम शुरू हो जायेगा। राज्यभर के कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को उस इलाके में भेजा जायेगा। कृषि मंत्री नागमणि ने अपने कार्यालय कक्ष में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो विशेषज्ञ बाहर से भी बुलाये जायेंगे। विभाग की प्राथमिकता बाढ़ के कारण मिट्टी के बिगड़े स्वरूप को ठीक करना है। पहले गाद हटाने का काम किया जायेगा उसके बाद मिट्टी जांच का अभियान चलेगा। विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सिंचाई, ग्रामीण विकास और श्रम विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर गाद हटाने की योजना बना लें। उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सहमति प्राप्त कर उसपर अमल शुरू होगा। मंत्री ने कहा कि विभाग ने यह भी फैसला लिया है कि राज्यभर के सभी 32 विशेष प्रशिक्षण प्राप्त तकनीशियनों को नौ मिट्टी जांच के मोबाइल केन्द्रों के साथ बाढ़ प्रभावित जिलों में भेजा जायेगा। मिट्टी की पोषण क्षमता की जांच करने के बाद किसानों को कृषि उपादान उपलब्ध कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उस इलाके के किसानों के बीच मुफ्त मिनी कीट का वितरण किया जायेगा। श्री नागमणि ने कहा कि इन जिलों में विभाग के सौ से अधिक कर्मचारी और अधिकारी भेजे जा चुके हैं। राहत काम में मदद करने के बाद वे फसलवार, खेसरावार और किसानों की श्रेणीवार फसल क्षति का आकलन करंगे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार उस इलाके में लगभग 3.30 लाख हेक्टेयर भूमि में धान की फसल लगाई गई थी। इनमें से लगभग डेढ लाख हेक्टेयर में लगी फसल नष्ट हो चुकी है।

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