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महाप्रयोगकी सुरंग में जा चुके हैं कलाम

देश की तीनों सेनाआें के सवर्ोच्च कमांडर के तौर पर कई हैरतअंगेज काम कर चुके डा. एपीजे अब्दुल कलाम ने बुधवार को स्वयं यह खुलासा किया कि वह उस सुरंग में जा चुके हैं, जहां दुनिया का महाप्रयोग शुरु हुआ है। ब्रह्मांड के उत्पत्ति के समय महाविस्फोट से पनपे ‘परमात्मा कण’ की खोज के लिए यह प्रयोग स्विटजरलैंड और फ्रांस की सीमा पर धरती की सतह से 330 फुट नीचे हो रहा है। इस महाप्रयोग मंे भारत के सौ से यादा वैज्ञानिक जुड़े हैं और 27 किलोमीटर लम्बी मशीन के जैक भारत में ही बने हैं। लेकिन यह बात अभी रहस्य ही थी कि पूर्व राष्ट्रपति कलाम भी इस रहस्यमई सुरंग में जा चुके हैं। डा. कलाम ने बुधवार को स्वयं इस बात की पुष्टि की कि वह इस सुरंग में जा चुके हैं। सेना के अंग प्रत्यारोपण प्राधिकरण के एक समारोह में संवाददाताआें से बातचीत करते हुए डा. कलाम ने कहा कि मैं उस सुरंग में गया हूं। वैज्ञानिक वहां एक कण का पता लगा रहे हैं ताकि यह जाना जा सके कि धरती कैसे जन्मी थी। डा. कलाम ने आश्वस्त किया कि इस महाप्रयोग से कोई खतरा नहीं है। यह प्रयोग भौतिकी के लिए अच्छा है। परमाणु वैज्ञानिक डा. कलाम देश के राष्ट्रपति के रुप में दुनिया की सबसे ऊंची रणभूमि सियाचिन की यात्रा पर गए थे। उन्होंने भारतीय वायु सेना के सुखोई लड़ाकू विमान से उड़ान भरी थी और समुद्र की अतल गहराई में वह पनडुब्बी में भी एक घंटे से यादा समय रहे थे। परमाणु वैज्ञानिक के तौर पर वह पोखरण के उस स्थान पर भी जा चुके हैं, जहां परमाणु बम का विस्फोट किया गया था।

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