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वर्षो तक रहेगा कहर का असर!ं

प्रलय का पर्याय बन चुकी कोसी के कहर को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वर्षो तक झेलना पड़ सकता है। सरकार के लाख प्रयास के बावजूद उन इलाकों में भूमि को खेती के योग्य बनाना बहुत आसान नहीं होगा। सृजन की नई कहानी लिखने की कल्पना करने वालों के होश पानी उतरते ही उड़ने लगेंगे।ड्ढr कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लगाये जा रहे कयास अगर सही निकले तो पानी उतरने के बाद जो मिट्टी दिखेगी उसका रंग और रूप दोनों बदला हुआ होगा।ड्ढr ड्ढr हालांकि कृषि विभाग के सचिव ई एल एन एस बालाप्रसाद ने कोसी क्षेत्र का दौरा करने के बाद दावा किया कि स्थिति जल्द ही नियंत्रण में होगी। उनकी बातों पर भरोसा करं तो कृषि विभाग हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। वैज्ञानिकों की पूरी फैा पानी उतरते ही इलाके में तैनात कर दी जायेगी। लेकिन वैज्ञानिकों के तर्क के सामने सचिव के दावे टिक नहीं पाते। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी उतरने के बाद कोसी की सोना उगलने वाली मिट्टी पर जो परत होगी उसपर वहां के मौसम में खेती संभव नहीं होगी। साथ ही वह परत (गाद) इतनी मोटी होगी कि उसे हटाना भी बड़ी समस्या होगी।ड्ढr बड़ी- बड़ी मशीनों के प्रयोग के बाद भी उसे हटाने में वर्षो लग सकते हैं। इसी के साथ एक सवाल यह भी उठने लगता है कि गाद को हटाकर रखा कहां जायेगा? हालांकि वैज्ञानिकों के जेहन में दूसरी संभावनाएं भी हैं। उसके अनुसार ऐसा संभव हो सकता है कि कुछ ही इलाके की भूमि उसर हो, शेष इलाके की मिट्टी पहले से भी अधिक उपजाऊ हो सकती है। लेकिन इसकी संभावना वे कम ही आंकते हैं।ं

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