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मां के चांटे ने सिद्धार्थ को बनाया वैज्ञानिक

धरातल से 170 मीटर नीचे 27 किमी लंबे ओवल सुरंग में शून्य से नीचे 271 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ब्रहमांड के जन्म के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के महाप्रयोग का हिस्सा बने सिमडेगा के सिद्धार्थ ने बुधवार को अपने घर फोन पर पहले दिन की सफलता की बात बतायी। इस महाप्रयोग में लगे विश्व के 85 देशों के आठ हाार वैज्ञानिकों के दल के सदस्य सिद्धार्थ ने महाप्रयोग शुरू होने व सफलता पूर्वक आगे बढ़ने के बाद सिमडेगा में अपने भाई मनोज कोनबेगी व अन्य सदस्यों से बातचीत की। उन्होंने प्रारंभिक सफलता का जिक्र करते हुए आशा व्यक्त की कि महाप्रयोग निश्चित रूप से दुनिया को नुकसान पहुंचाये बगैर लक्ष्य को प्राप्त करगा। इधर, अपने लाल की उपलब्धियों से गर्वान्वित सिद्धार्थ के माता-पिता व परिान बुधवार की सुबह से ही महाप्रयोग की रिपोर्टिग पर नजर जमाये थे। तय समय 12:30 बजे सफलता पूर्वक महाप्रयोग शुरू होने की खबर आते ही पूरा परिवार भी खुशी से झूम उठा। शहर के ठाकुरटोली स्थित अपने आवास पर सिद्धार्थ की मां श्रीमती विद्या देवी ने ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत करते हुए कहा कि सिद्धार्थ ने उनका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उनकी आंखों से निकल रहे खुशी के आंसू यह बताने के लिए काफी थे कि एक मां के रूप में वे कितनी खुश हैं। सुबह-सुबह ‘हिन्दुस्तान’ में छपी अपनी पुत्र की तस्वीर व महाप्रयोग की खबर देख वे बेहद खुश थी। वे विद्यादेवी मुहल्लावासियों की बधाई भी स्वीकार कर रही थी। उन्होंने सिद्धार्थ के बार में बताया कि गांव से सिमडेगा लाने के बाद उसका नामांकन संत अन्ना बालक प्राथमिक स्कूल में नहीं हो सका। तब उसका नाम ठाकुरटोली मीडिल स्कूल में कराया गया। पहले दिन स्कूल भेजने के लिए उन्होंने चांटे भी मार थे, परंतु उसके बाद वह स्वयं आगे बढ़ता गया और वैज्ञानिक बनकर देश का नाम रौशन कर रहा है। उन्होंने बताया कि ठाकुरटोली में एक-दो वर्ष पढ़ने के बाद पुन: सिद्धार्थ का नाम संत अन्ना स्कूल में लिखा गया। बाद में उसका सेलेक्शन नवोदय में हुआ। श्रीमती विद्या देवी ने कहा कि उनकी यही इच्छा है कि वह और आगे बढ़े व देश, राज्य व जिला का नाम रौशन करं। सिद्धार्थ की उपलब्धियों से उसके पिता सह पूर्व मुखिया कृष्णा प्रसाद, एक और मां श्रीमती द्रौपदी देवी, भाई विश्वजीत, सत्यजीत, मनोज, विपिन व अरविंद, बहन सरोलत्ता, कुमुद, गीता, आरती व माधुरी भी बेहद खुश है और सिद्धार्थ की सलामती व और आगे बढ़ने की कामना कर रहे हैं।ं

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  • Web Title: मां के चांटे ने सिद्धार्थ को बनाया वैज्ञानिक