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खूब घूमे प्रोटॉन,झूमे वैज्ञानिक

धरती के सौ मीटर नीचे सात हाार वैज्ञानिक कम्प्यूटर पर नारं गड़ाए थे और दुनियाभर में लोग टीवी से चिपके हुए थे। बुधवार को भारतीय समय के मुताबिक दोपहर साढ़े 12 बो ‘महामशीन’ का बटन दबाया गया। एक सिलेंडर से हाइड्रोन गैस महामशीन में डाली गई और इसके परमाणु को तोड़ा गया। इससे निकले प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। प्रोटॉन कणों को मशीन में लगे बड़े-बड़े चुम्बकों से एक छोटे गोलाकार पथ पर पहले घुमाया गया। ठीक वैसे ही, ौसा गोला फेंक प्रतियोगिता से पहले एथलीट करते हैं। इन कणों ने ौसे ही प्रकाश की गति से थोड़ी कम रफ्तार पकड़ी, उन्हें 27.36 किलोमीटर लंबी सुरंगनुमा मुख्य मशीन में घड़ी की सुई की दिशा में दौड़ा दिया गया।ड्ढr एक बाल की मोटाई में प्रोटॉन का यह पुां ौसे ही महामशीन (लरा ह्रेडॉन कोलाइडर) में दौड़ा और कम्प्यूटर के मॉनीटर में दो सफेद बिन्दुओं के रूप में दिखा, वैज्ञानिकों के चेहर खुशी से दमक उठे। शैम्पेन की बोतलें खोलीोाने लगीं और हर ओर ‘चियर्स-चियर्स’ की आवाा उठने लगी। इसके साथ ही आम आदमी की धड़कन भी सामान्य हुई। दुनिया के खत्म होने की उसकी आशंका निमरूल साबित हो गई थी। इस महाप्रयोग के अगले चरण में प्रोटॉन पुां को घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में चलाकर देखाोाएगा और फिर 21 अक्तूबर को प्रोटॉन पुांों के बीच टक्कर कराकर महाप्रयोग की असली शुरुआत कीोाएगी। प्रोटॉन्स की इस टक्कर से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का राा खुलने की आशा वैज्ञानिकों को है। ब्रह्माण्ड कैसे बना, इस पर ‘बिग बैंग’ यानी महाविस्फोट नाम की एक थ्योरी है। स्कॉटलैण्ड के वैज्ञानिक पीटर हिग्स के मुताबिक सिक्केोितने द्रव्य ने अचानक फैलना शुरू किया था और इस दौरान ‘हिग्स बोसॉन’ या गॉड पार्टिकल बने थे,ोिनसे सभी ग्रह और तारों का निर्माण हुआ। महामशीन से इसी गॉड पार्टिकल की खो कीोानी है। महाप्रयोग को करने वाले यूरोपियन ऑर्गेनाक्षेशन फॉर न्यूक्िलयर रिसर्च (सर्न) की प्रवक्ता पाओला कैटापानो ने बताया कि महामशीन बिल्कुल ठीक काम कर रही है और सब कुछ ठीक चला तो अगले महीने असल प्रयोग की शुरुआत होगी। मशीन के चालू होने के मौके पर दुनियाभर के नौ हाार भौतिकविद् मौाूद थे। इनमें भारत के भी 30 वैज्ञानिक शामिल हैं। प्रोटॉन पुां ने एलएचसी का एक चक्कर लगा लिया तो परियोना के प्रमुख वैज्ञानिक लिन इवांस के मुँह से निकला, ‘सफल हो गया पहला कदम।’ड्ढr सर्न के प्रमुख रॉबर्ट एमर भी प्रयोगशाला के कंट्रोल रूम में मौाूद थे। वह घूम-घूमकर सभी वैज्ञानिकों को बधाई देते रहे। सर्न के मुख्य प्रवक्ता ोम्स गिलिस ने मशीन के भीतर छोटे ब्लैक होल बनने की आशंकाओं पर पूछे गए सवाल काोवाब दिया कि इस तरह की बातें कहने वाले मूर्ख हैं। मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग पहले ही एसी आशंकाओं को निमरूल बता चुके हैं।ड्ढr गिलिस ने कहा कि अगर एसा होता भी है तो दुनिया को कोई खतरा नहीं होगा। मशीन को कंक्रीट की माबूत सुरंग में स्थापित किया गया है और किसी गड़बड़ी का असर बाहर तकोाएगा ही नहीं। उन्होंने बताया कि अभी यह देखना है कि प्रोटॉन कण मशीन के भीतर ठीक से चक्कर लगा पा रहे हैं या नहीं या इनकी राह में कहीं रुकावट बन रही है। अगर कोई रुकावट हुई तो इसे ठीक कियाोाएगा।

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