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..और गायब हुईं चिंता की रखाएं

और शुभ-शुभ गुजर गया बुधवार। मनन शर्मा जी, सुधांशु मिश्रा जी, मो. बब्लू, ओंकार नाथ राय , रमेश वर्मा , कमल चंद्रवंशी , राजेश झा, तन्नु शर्मा, सरिता, नीलम शर्मा , सबके चेहर पर कई दिनों से उभरी चिंता की रखाएं खत्म हुईं। लोग दिनभर टीवी सेटों पर चिपके रहे। विभिन्न चैनलों को घुमा-घुमा कर लोग ‘अपडेट इन्फार्मेशन’ जान रहे थे। गली-मोहल्लों व चौक-चौराहों पर भी चर्चाएं गरम रहीं। स्कूल व कालजों में भी बच्चों के लिए यह हॉट टॉपिक बना रहा है। कई लोगों ने तो आज अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेजा था।ड्ढr ड्ढr लोग मोबाइल फोन से नाते-रिश्तेदारों से हाल-चाल लेते रहे। बेटा वहां सब ठीक है न। बहू तुम्हरे शहर में कुछ हुआ तो नहीं। मोबाइल फोनों पर दिनभर इसी तरह की बातें होती रहीं। स्टेशन हो या बस स्टैंड चर्चा तो बस थी कि क्या सच में दुनिया का विनाश हो जाएगा। हालांकि पिछले दो दिनों से लोग पूरी तरह आश्वस्त हो गए थे कि कुछ नहीं होगा। फिर भी मन के किसी कोने में कुछ आशंका तो दबी हुई थीं। खासकर महिलाएं व बच्चों में इसको लेकर काफी उत्सुकता थी।ड्ढr दोपहर में जैसे ही घड़ी में बारह बजा कि लोग टीवी सेटों से चिपक गए। सड॥कों पर लोगों की आवाजाही कम हो गयी। लोग यह जानने को बेताब थे कि दुनिया के किसी कोने में कुछ हुआ तो नहीं। घरों में मोबाइल व फोन लगातार घनघनाते रहे। कई लोगों ने तो आफिस से छुट्टी भी ले ली थी। छुट्टी कैसे न लेते हाईकमान(पत्नी) का हुक्म जो था। वहीं कुछ लोगों ने बच्चों को भी स्कूल जाने से मना कर दिया। हालांकि जैसे-जैेसे दिन चढ़ता गया लोगों के चेहर पर चिंता की रेखाएं गायब होती गयीं। शाम होते-होते लोगों ने पूरी तरह राहत की सांस ले ली।

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