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नैनो का सिंगुर में रहना देशहित में

नैनो का सिंगुर में रहना देशहित मेंड्ढr सिंगुर में मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य ने जो पश्चिम बंगाल में उद्योग लगवाने एवं वहां स्थानीय लोगों को रोगार दिलवाने का स्वप्न देखा था, ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए पूर प्रदेश को उद्योगों से वंचित करने की पूरी ताकत लगा दी। पर रतन टाटा द्वारा सिंगुर सै नैनो प्लांट हटाने की बात पर और राज्यपाल द्वारा मध्यस्थता करने पर यह समझौता हुआ। क्या यह देश के हित में नहीं है?ड्ढr गोपाल सिंह नयाल, पुष्पविहार, नई दिल्ली मत खेलो! प्रकृति सेड्ढr हमार पूर्वजों ने नदी की शक्ित को पहचाना था। नगर, गांव, शहर, नदियों के किनार बसते गए। नदियों की जलधारा ने हमें जीवन दिया। पर शांत नदी से छेडख़ानी होने लगी। किनारों की हरियाली मिटा कर, आवास खड़े होने लगे। नदियों के पानी को बांधना शुरू कर दिया। वर्षो से सिमटी कोसी और यमुना अपने पुराने रूप में आ गई। हमने अपनी गंदगी, पापों से मुक्ित प्राप्त करने के लिए नदी को उत्तम विकल्प माना। नदी को नदी नहीं, अपनी जागीर मान ली।ड्ढr राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्ली ग्रीन-ऊरा क्रांतिड्ढr आखिरकार कुछ दबावों और आनाकानियों के बावजूद भारत-अमेरिका परमाणु करार को न्यूक्िलयर सप्लायर्स ग्रुप की बैठक में हरी झंडी मिल गई। इसके लिए न हमने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत किए और न ही ‘टैस्ट बेन ट्रीटी’ पर। इससे हमें एनएसजी देशों से परमाणु ईंधन, परमाणु रिएक्टर और उत्तम विकसित तकनीक हासिल करने में छूट मिलेगी। यह सही है कि सन 2020 तक केवल 20,000 मेगावॉट बिजली ही परमाणु रिएक्टरों से उपलब्ध हो जाएगी, मगर आगे चल कर ऊरा के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत परमाणु ऊरा होगी। और 3-4 दशकों तक जब थोरियम-232 को यूरनियम-233 में तत्वान्तरण पूरी तरह से सफल प्रणाली का रूप ले लेगा तो भारत हमेशा के लिए ऊरा क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा।ड्ढr डॉ. आर. के. मल्होत्रा, नई दिल्ली आत्ममंथन का समयड्ढr नंदा जसे बहुचर्चित हाईप्रोफाइल मामलों का यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो यह स्पष्ट हो जाता है कि दौलतमंद लोगों के दिल से समाज और कानून का भय समाप्त हो गया है। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिष्ठित वकीलों के द्वारा गवाह को खरीदने की कोशिश की गई। अदालत के फैसले को यह कह कर भी प्रभावित करने की कोशिश की गई कि पीड़ित परिवारों को 65 लाख रुपए मुआवजा दिया जा चुका है। ऐसे बिगड़ैल रईसजादों और उनके परिवार वालों के लिए यह आत्ममंथन का समय है।ड्ढr डॉ. शमीम खान, राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली राजनीति में महिलाड्ढr संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण पास नहीं होने पर भी महिलाओं ने हार नहीं मानी और आज महिला राजनीति के ऊंचे पदों पर विराजमान है। आज हमार देश की महिलाएं लाख मुश्किलों के बाद भी अपनी भूमिका राजनीति में अच्छी तरह से निभा रही हैं। यदि 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल पास हो जाता तो इनका राजनीति में पहुंचना और भी आसान हो जाएगा।ड्ढr नीलम रावत, जामिया मिल्लिया इस्लामियां

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