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राहत शिविरों में नोडल अफसर की नियुक्ित हो

उत्तर-पूर्वी राज्यों के राहत शिवरों में रह रहे बच्चों की स्थिति दिल दहलाने वाली है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वहां रह रहे बच्चे जानवरों से भी बदतर जीवन जी रहे हैं। तरह-तरह की बीमारियों से ग्रस्त, खाने-पीने को मोहताज इन बच्चों के हर अधिकार का हनन हो रहा है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इन राहत शिवरों में नोडल आफिसर नियुक्त करने की मांग की है ताकि वे इनको मिलने वाली सुविधाओं पर निगरानी रख सकें। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शांता सिन्हा की अध्यक्षता में पांच सदस्यों के एक दल ने आठ दिन तक उत्तर-पूर्व के तीन राज्यों-असम, त्रिपुरा और मणिपुर-का दौरा किया। वहां के राहत शिवरों में रह रहे परिवारों खासकर बच्चों के हालात का इन्होंने जायजा लिया और पाया कि बरसों से शिवरों में रह रहे इन बच्चों के जीवन में किसी तरह का कोई स्थायित्व नहीं है। शांता सिन्हा ने राहत शिवरों की हालत का जिक्र करते हुए पत्रकारों को बताया कि वहां बच्चे एचआईवी-एड्स, निमोनिया, डेंगू, डायरिया, मलेरिया और कुपोषण के शिकार हैं, लेकिन उन्हें कोई स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वहां के बच्चों की शिक्षा तक पहुंच नहीं है। शिवरों के लिए अगर स्कूल हैं भी तो 400-500 बच्चों पर एक अध्यापक है, पेयजल और टॉयलेट की सुविधा नहीं है और न ही उन्हें मिड जे मील मिलता है। प्राइवेट स्कूलों की हालत एसी है कि वे 11 साल से अध्यापकों को वेतन तक नहीं दे पा रहे।

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  • Web Title: राहत शिविरों में नोडल अफसर की नियुक्ित हो