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लिट्टे के दो आला नेताओं का सरेंडर

श्रीलंका के उत्तर पूर्वी मुल्लईतिवु में लिट्टे के कब्जे वाले ‘नो-फायरिंग जोन’ में सेना और बचे-खुचे विद्रोहियों के बीच चल रहे घमासान के बीच पिछले दो रो में एक लाख से अधिक तमिल नागरिक बेदखल होने को मजबूर हो गए। सेना ने कहा है कि उसने बुधवार को लिट्टे के कम से कम 35 लड़ाके ढेर कर दिए और कई अन्य घायल हैं। इस बीच लिट्टे के प्रवक्ता वी. दयानिधि उर्फ दया मास्टर और एक अन्य अन्य शीर्ष अधिकारी जॉर्ज ने बुधवार को मुल्लाईतिवु क पुथुमथालन में सेना के समक्ष सरंडर कर दिया। लिट्टे के इन कुख्यात नेताओं के सरंडर को, पिछले दो दशक से श्रीलंका को दहलाने वाले इस छापामार संगठन के पतन की शुरुआत बताया जा रहा है। हालांकि लिट्टे का दावा है कि उसके नेताओं ने सरंडर नहीं किया, बल्कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है। अब सेना का सारा ध्यान लिट्टे प्रमुख वी. प्रभाकरण पर है जिसके बार में पक्की खबर है कि वह अपने कुछ सिपहसालारों के साथ ‘नो-फायरिंग जोन’ में ही मौजूद है। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने कहा है कि प्रभाकरण ने तयशुदा समय के भीतर सरंडर न कर क्षमादान की संभावना पर पानी फेर दिया है। अब उसे अपनी करनी का फल भुगतना ही होगा। इस बीच, पुथुमथालन को दो तरफ से घेर चुकी श्रीलंकाई सेना ने ‘नो फायरिंग जोन’ में अंदर तक मार की है। करीब 17 वर्ग किलोमीटर के इस क्षेत्र में अभी भी हाारों तमिल नागरिक फंसे हुए हैं। लिट्टे ने आरोप लगाया है कि सेना विभिन्न ठिकानों पर शरण लिए हुए बेकसूर तमिल नागरिकों को मोर्टार और गोले इत्यादि से निशाना बना रही है। बुधवार को सेना की इस कार्रवाई में क्षेत्र के अस्थाई अस्पताल में घायलों का इलाज कर रहे डाक्टर और मेडिकल स्टाफ सहित सात लोग मार गए। इस बीच, श्रीलंका सरकार ने एक बार फिर अतंरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा की जा रही संघर्ष विराम की अपील ठुकरा दी है।

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