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बढ़ गया है आपदा प्रबंधन विभाग का काम

आपदा प्रबंधन विभाग का काम अब बढ़ गया है। यहां के बाबू और अधिकारियों को अब बाढ़, सुखाड़ और आगजनी जसी प्राकृतिक आपदाएं ही नहीं, बड़ी सड़क अथवा ट्रेन दुर्घटनाओं के अलावा कल-कारखानों में प्रदूषण या अन्य कारणों से होने वाले संकटों का भी हिसाब-किताब रखना होगा। दरअसल कोसी के कहर ने गैर प्राकृतिक आपदाओं को लेकर भी सरकार को सतर्क कर दिया है। ऐसी दुर्घटनाओं में जान-माल की क्षति होने पर आपदा प्रबंधन विभाग प्रभावित लोगों को अनुदान और मुआवजा लेगा।ड्ढr पहले इस तरह के मामले गृह विभाग देखता था।ड्ढr ड्ढr गैरप्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने बिहार आकस्मिकता निधि से एक करोड़ रुपया अग्रिम लेने का प्रस्ताव दिया है जिसे मंत्रिमंडल ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार गैरप्राकृतिक आपदाओं के मामले में भी राज्य में जान-माल की व्यापक क्षति होती है। प्राकृतिक आपदाओं के मामले में तो आपदा प्रबंधन विभाग भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार अनुग्रह अनुदान देता था लेकिन गैरप्राकृतिक आपदाओं का मामला गृह विभाग को भेज दिया जाता था।ड्ढr ड्ढr गृह विभाग के पास पहले से ही काम का बोझ ज्यादा है लिहाजा ऐसे मामलों में कार्रवाई करने में उसे काफी कठिनाई होती थी। अब राज्य सरकार ने ऐसे मामलों को आपदा प्रबंधन विभाग को सौंपने का फैसला किया है। दूसरी तरफ विभाग से यह भी जानकारी मिली है कि कोसी की बाढ़ से तबाह हुए लोगों को राहत पहुंचाने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से रोड़ रुपये लेने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है। इस राशि से बाढ़ प्रभावित जिलों में मृत लोगों के परिानों को अनुग्रह अनुदान, पेयजल की आपूर्ति और बाढ़पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा देने आदि पर खर्च किया जाएगा।

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