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गीता के सभी श्लोक धाराप्रवाह सुनाती है सात वर्षीया ऋद्धिप्रदा

आश्चर्य किन्तु सत्य है कि महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण द्वारा अजरुन को सुनाये गये अठारह अध्याय गीता को हस्तलिखित करने में लगी है सात वर्षीया बालिका ऋद्धिप्रदा। पांच वर्ष की आयु पूरी करने के पूर्व ही इसने गीता के सभी सात सौ संस्कृत के कठिन श्लोकों को कंठाग्र कर साबित कर दिया कि मैत्रेयी और गार्गी की धरती पर शंकर मिश्र जसी प्रतिभा से अब भी यह भूमि खाली नहीं है। क्िलष्ट शब्दों के शुद्ध उच्चारण व धाराप्रवाह श्लोकों का पाठ सुनाकर यह बालिका विद्वतजनों को सोचने पर मजबूर कर देती है।ड्ढr ड्ढr विद्वान इसे पूर्व जन्म का संस्कार तो कोई चमत्कार कहते हैं। मधवापुर प्रखंड के रइमा गांव निवासी शत्रुमर्दन कुमार की पुत्री ऋद्धिप्रदा ने खेलने की उम्र में अपनी निखरती प्रतिभा से वाराणसी के रामानंद, पीठाधीश हर्याचार्य, वृंदावन के बाल व्यास हरिशरण उपाध्याय व हरियाणा की आचार्या लक्ष्मी भारती से आशीर्वाद लेने का गौरव प्राप्त किया। विलक्षण प्रतिभा की धनी ऋद्धि को इन दिनों पढ़ाई की समस्या से जूझना पड़ रहा है। चौथी कक्षा में पढ़ रही ऋद्धि अपनी छोटी बहन को भी पढ़ाती है। इसको गीता सिखलाने के गुरु सह परदादा डॉ. एपी चौधरी का मानना है कि मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अर्थप्रधान युग में बिना सरकारी सहयोग के इस प्रतिभा को समुचित स्थान दिलवाने की कल्पना नहीं की जा सकती है।

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  • Web Title: गीता के सभी श्लोक धाराप्रवाह सुनाती है सात वर्षीया ऋद्धिप्रदा