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गोदाम रसीद पर बैंकों को देना ही पड़ेगा लोन

किसानों की माली हालत सुधारने तथा उन्हें साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने नई कानूनी पहल की है। फसल तैयार हो चुकी है और बाजार में भाव अच्छे नहीं मिल रहे तो औने-पौने में बेचने की बजाय नजदीकी गोदाम में जमा करा सकते हैं। गोदाम से जारी होने वाली रसीद पर किसान बैंक से बिना गारंटर लोन हासिल कर सकते हैं। अनाज की कीमत का 70 फीसदी तक ऋण किसानों को मिलेगा। वेयरहाउसिंग डवलपमेंट एंड रगुलेशन एक्ट में बैंकों के लिए रसीद के आधार पर ऋण देने को अनिवार्य कर दिया है। कानून बन चुका है और इसके प्रावधानों को अधिसूचित किया जा रहा है। केंद्रीय भंडारण निगम के एजीएम एस. नारायण के अनुसार अगली फसल से किसानों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। अभी तक गोदामों से जारी होने वाली रसीद बैंकों को मान्य नहीं थी। किसानों को कर्ज के लिए साहूकारों की शरण में जाना पड़ता था या अपनी फसल औने-पौने दाम में बेचनी पड़ती थी। अब नई बात यह भी कि रसीद दिखाकर ही किसान मंडी में अपना अनाज बेच सकते हैं। इसमें अनाज की गुणवत्ता का ब्यौरा और जमा कराते समय अनुमानित कीमत और मात्रा दर्ज रहती है। कृषि कारोबार से जुड़े विशेषज्ञ अंजनी सिन्हा के अनुसार इस कानून में दो और संशोधन होने चाहिए। एक रसीद के आधार पर किसान को देश में कहीं भी अपनी फसल बेचने की अनुमति होनी चाहिए। इसके लिए एपीएमसी एक्ट के उन प्रावधानों को खत्म करना होगा जिसमें वह नजदीकी मंडी में ही फसल बेच सकता है। दूसर, गोदामों में अनाज की चोरी होने पर वेयरहाउस के लिए भरपाई का प्रावधान होना चाहिए। एनसीएमएसएल के सीईओ संजय कौल कहते हैं कि इन खामियों को दूर कर दिया जाए तो किसानों के लिए योजना अच्छी है, लेकिन वेयरहाउस की काफी कमी है। कोल्ड स्टोरज तो बहुत ही कम हैं।

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