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ईंधन के वादे पर आगे पीछे से भारत खफा

परमाणु ईंधन आपूर्ति की वचनबद्धता बाध्यकारी न होने के संबंध में बुश प्रशासन की ओर से कांग्रेस को ोो गए पत्र से भारत में नया विवाद खड़ा हो गया है। वाम और भाापा ने इस मुद्दे पर फिर सरकार को निशाने पर लिया है। इस पूर प्रकरण पर अमेरिकी प्रशासन से नाराा भारत ने कहा है कि वह यह मुद्दा उसके सामने उठाएगा। इसके साथ ही भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि 123 समझौता भारतीय हितों की हिफाात करगा। इस बीच अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता सीन मैक कॉरमैक ने राष्ट्रपति बुश के पत्र पर कोई सीधी टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इसे पूरी तरह तभी समझाोा सकता हैोब इस पर कांग्रेस में चर्चा होगी।ड्ढr बुश ने अमेरिकी कांग्रेस को ोो गए पत्र में कहा है कि समझौते में परमाणु ईंधन की निर्बाध आपूर्ति के बार में कुछ राानीतिक वादे किए गए हैंोो बाध्यकारी नहीं हैं। इस संदर्भ में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि वादे राष्ट्रपति बुश और अमेरिकी सरकार द्वारा सम्मानित वादे हैं। हालाँकि ये वादे राानीतिकोरूर हैं, लेकिन बुश ने यह नहीं कहा कि वे वादों का सम्मान नहीं करंगे। यह अलग बात है कि वादे बाध्यकारी हैं या नहीं।ड्ढr वरिष्ठ माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि बुश अब राष्ट्रपति की कुर्सी पर सिर्फ कुछ दिन के ही मेहमान हैं। अमेरिका के लिए समझौते पर कोई विधिक बाध्यता है तो वह सिर्फ हाइड एक्ट और इसमें ईंधन की आपूर्ति के संबंध में कोई आश्वासन नहीं है। माकपा पोलित ब्यूरो के एक बयान में कहा गया है कि ता घटनाक्रम से लगता है कि आईएईए सेफगार्ड समझौैते के बार में भी झूठ बोल रहे हैं। मुख्य विपक्षी दल भाापा ने भी सरकार से स्पष्टीकरण की माँग करते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश की परमाणु संप्रभुता का ख्याल नहीं रख रही। भाापा अध्यक्ष राानाथ सिंह ने बंगलुरु में पार्टी कार्यकारिणी बैठक में कहा कि प्रधानमंत्रीोानबूझकर देश को, संसद को और राानीतिक दलों को गुमराह कर रहे हैं।

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