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महिला विधेयक को पुरुष पारित नहीं करना चाहते:रमणिका गुप्ता

साहित्य के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात नेता सह प्रखर साहित्यकार रमणिका गुप्ता ने कहा कि तापस जसे प्रकरण से तभी मुक्ित संभव है जब संसदीय तरीके से जनआंदोलन हो। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार का पैमाना अब पूर उफान पर है। संसद में उछाले गये नोटों का बंडल भी उसी की एक बानगी है। वह हिंदुस्तान से खास बातचीत कर रही थीं। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि महिला विधेयक को पुरुष पारित नहीं होने देना चाहते क्योंकि उन्हें कहीं न उन्होंने कहा कि पुरुषों को स्वामी बनकर नहीं औरत को साथी के रूप में देखना चाहिए। संघर्षशील महिला साहित्यकार ने बताया कि 13 सितंबर को रांची यूनिवर्सिटी में महिलाओं के स्वाबलंबन विषय पर वे देशभर से आये ट्रेनिज के समक्ष अपना व्याख्यान देंगी। उन्होंने बताया कि पिछले माह ही उनकी तीन पुस्तकें आदिवासी विकास से विस्थापन, आदिवासी साहित्यिक यात्रा और आदिवासी कौन प्रकाशित हुई है।

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