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बुश की विवादित टिप्पणी पर व्हाइट हाऊस चुप

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश के इस विवादास्पद कथन पर टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया है। भारत को परमाणु ईंधन की आपूर्ति के लिए अमेरिका कानूनी रूप से बाध्य नहीं है तथा भारत को संवदेनशील तकनीक भी नहीं दी जाएगी। वहीं भारत अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग के 123 समझौते के अनुमोदन के लिए अमेरिकी कांग्रेस की 18 सितंबर से शुरु हो रही बैठकों में विचार किए जाने की संभावना है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शेन मैक्कोरमैक ने बुश के कथन और उस पर भारत की नाराजगी के बारे में सीधे रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। संवाददाताआें के सवालों को टालते हुए उन्होंने कहा कि यह पत्र बुश ने अमेरिकी कांग्रेस को लिखा था, बेहतर होगा कि जवाब के लिए व्हाइट हाऊस से संपर्क किया जाए। पत्रकारों ने जब उनसे यह पूछा कि राष्ट्रपति ने समझौते को कांग्रेस के पास भेजते समय समझौते की जो व्याख्या की है क्या वह मान्य है तो मैक्कोरमैक ने कहा कि राष्ट्रपति का पत्र एक सार्वजनिक दस्तावेज है। इसका अर्थ साफ जाहिर है। उन्होंने कहा कि 123 समझौते के बारे में अमेरिका और भारत सरकार के बीच व्यापक चर्चा हुई है और जब इस समझौते पर कांग्रेस में चर्चा होगी तो और जानकारी पेश की जाएगी। उल्लेखनीय है कि बुश ने 123 समझौत को इस व्याख्या के साथ अमेरिकी कांग्रेस के पास भेजा था कि भारत को ईंधन आपूर्ति का वायदा राजनीतिक है तथा यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने भारत को संवेदनशील तकनीकी नहीं देने की बात भी कहीं थी। भारत ने बुश के इस कथन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कल कहा था कि 123 समझौता अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मानदंडो के अनुसार एक कानूनी दस्तावेज माना जाएगा तथा भारत इसी समझौते को मानेगा। इस बीच व्हाइट हाऊस ने बुश के पत्र से पैदा हुए विवाद के बारे में कुछ नहीं कहा है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस जब 123 समझौते पर चर्चा करेगी तो उसमे प्रशासन के प्रतिनिधि साक्ष्य देंगे तथा समझौते के प्रावधानों का खुलासा करेंगे। प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस के समक्ष होने वाले बयानों में सारी जानकारी दी जाएगी और हमें इसका इंतजार करना चाहिए। प्रवक्ता ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव ने परमाणु समझौते के बारे में विचार विमर्श किया है। अमेरिकी सरकार के सूत्रों के अनुसार अमेरिकी ऊपरी सदन (सीनेट) की एक समिति आगामी 18 सितंबर को 123 समझौते पर विचार करेगी। सीनेट की विदेश मामलों संबंधी इस समिति के सामने सहायक विदेश मंत्री विलियम बर्न्‍स प्रशासन के एकमात्र प्रतिनिधि होंगे तथा समझौते के बारे में सांसदांे के सवालों का जबाव देंगंे। सीनेट की विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष जोसेफ वाइडन है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी हैं। चुनाव प्रचार में उनकी व्यस्तता के कारण समिति की बैठक डेमोक्रेटिक के पार्टी क्रिस डोड की अध्यक्षता में होगी। वाइडन ने राष्ट्रपति द्वारा 123 समझौते को कांग्रेस को भेजे जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा था कि सदन इस पर जल्दी से जल्दी सुनवाई करने का इच्छुक है। अमेरिकी कांग्रेस ने 123 समझौते को रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनो दलों का समर्थन मिलने की संभावना है तथा यह संभव है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की आगामी 25 सितंबर को अमेरिका की यात्रा के पहले इसे अनुमोदन हासिल हो जाए। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पैलोसी ने आशा व्यक्त की है कि 25 सितंबर तक समझौते का अनुमोदन हो सकता है। अनुमोदन के लिए आवश्यक 30 दिन की निश्चित अवधि की बाध्यता समाप्त की जा सकती है। लेकिन कांग्रेस के कुछ महत्वपूर्ण सदस्य समझौते पर पूरी चर्चा करने तथा जल्दबाजी न दिखाने की बात कह रहे है।

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