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मदद के लिए उठे हाथ

दिल्लीवालों को दिलवाला यूं ही नहीं कहा जाता। संकट की स्थिति में किस तरह मदद के लिए हाथ से हाथ और कंधे से कंधा मिलाकर लोगों ने घायलों की मदद की ये नजारा गजब का था। क्या रिक्शे वाला और क्या कार में सवारी करने वाला। जसे ही विभिन्न इलाकों में बम धमाके हुए तो लोगों ने पुलिस की बाट जोहने की नासमझी नहीं की और घायलों को अपने हाथों और कंधे का सहारा देकर उन्हें खड़ा किया और अस्पताल पहुंचाने का काम किया। ब्लास्ट के बाद फैले आतंक के सामने दिल्लीवालों ने गजब की दिलेरी दिखाई और घायलों की मदद की। लोग एक दूसर की मदद ऐसे हालात में कर रहे थे जब धमाके एक के बाद एक हो रहे थे। वहीं दूसरी तरफ, अलग अलग जगहों पर जीवित बम भी मिल रहे थे। पर लोगों के दिलों में घायलों की मदद का जज्बा घर कर चुका था। सेन्ट्रल पार्क में हुए धमाके के समय घटनास्थल पर मौजूद युवक चंचल ने घायलों में से कुछ लोगों को अपने कंधे पर डालकर पार्क से बाहर निकाला। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद चंचल के कपड़े और शरीर खून से सने हुए थे। उसने सेन्ट्रल पार्क में घायल हुए करीब 13 लोगों को अस्पताल पहुंचाया। वहीं ब्लास्ट के बाद सेवा भावना के साथ अस्पताल पहुंचे समाजसेवी अशोक रंघावा ने घायलों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें घर पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई। वहीं आरएसएस के कार्यकर्ता तथा युवा कांग्रेस के भी कई कार्यकर्ता मौके पर तथा अस्पताल में लोगों की मदद के लिए मौजूद थे। बम ब्लास्ट के तुरंत बाद राजीव चौक, जनपथ, पालिका बाजार समेत तमाम बाजार बंद करा दिए गए। फुटपाथ पर पटरी लगाने वालों ने जहां देखा वहीं अपना सामान पटक दिया लेकिन भागने की बजाए पूर जज्बे के साथ जुट गए मदद के लिए।

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