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सरकारी राहत शिविरों में कुव्यवस्था, उग्र हुए बाढ़ पीड़ित

मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद सरकारी राहत शिविरों की व्यवस्था में सुधार नहीं होने के कारण बाढ़ पीड़ितों का गुस्सा फूट पड़ा है। शनिवार को मरंगा के समीप एवं धमदाहा अनुमंडल मुख्यालय में सरकारी राहत शिविर के कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। न सोने का ढंग से ठिकाना है और न ही खाने की मुकम्मल व्यवस्था। शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को कोसी के जलस्तर में आंशिक कमी आने के बावजूद वीरपुर, त्रिवेणीगंज, प्रतापगंज एवं छातापुर में बाढ़ की स्थिति यथावत बनी हुई है। बाढ़ के साथ ही डायरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। सहरसा-सुपौल जिलों में डायरिया से तीन और बाढ़ पीड़ितों की मौत हो गयी है। बाढ़ प्रभावित गांवों में एक बार फिर एक से डेढ़ फीट पानी बढ़ गया है। पूर्णिया में जलस्तर बढ़ने की सूचना से लोग सहमे हैं। अररिया में सुरसर के निकट बलुवाही पुल के क्षतिग्रस्त होने से नरपतगंज प्रखंड क्षेत्र में आवागमन ठप हो गया है। पूर्णिया के राहत शिविरों में रह रहे लोगों की शिकायत हैं कि बच्चे एक पैकेट दूध और दो बिस्कुट खाकर दिन गुजार रहे हैं। मरंगा के मेगा शिविर में रह रहे करीब पांच हजार बाढ़ पीड़ितों के लिए मात्र एक किचन की व्यवस्था की गयी है। इस कारण वक्त पर पीड़ितों को भोजन नहीं मिल पाता है।ड्ढr ड्ढr इतना ही नहीं, घटिया खाना होने की वजह से अधिकांश लोग भूखे रह जाते हैं। शिकायत करने पर अधिकारी व्यवस्था में सुधार की बजाय उल्टे भड़क जाते हैं। गत 11 सितम्बर को इन पीड़ितों ने मुख्यमंत्री को इन बातों से अवगत कराया था। उनके निर्देश के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से लोग सड़कों पर उतर आये हैं। उधर, मौके पर उपस्थित महिला एसडीओ अश्विनी दत्ता र ठाकर ने पीड़ितों की इन शिकायतों को सिर से खारिज करते हुए कहा कि व्यवस्था में कहीं कोई कमी नहीं है। पीड़ितों की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व ऐसी हरकतें कर रहे हैं।

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