DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

ब्रह्म में लीन होना ही ब्रह्मचर्य : विभाश्री

दिगंबर जन समाज का पयरुषण (दशलक्षण पर्व) रविवार को पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हो गया। दिगंबर जन मंदिर, जेजे रोड में सुबह सैकड़ों धर्मावलंबियों ने स्नान-ध्यान कर भगवान जिनेंद्र का सामूहिक कलशाभिषेक किया।ड्ढr विधिविधान से पूजा-अर्चना की गयी। तत्वार्थसूत्र वाचन और आर्यिका विभाश्री माता जी का प्रवचन हुआ। माता जी ने दसवें धर्म उत्तम ब्रह्मचर्य पर चर्चा करते हुए कहा कि ब्रह्म में लीन होना ही ब्रह्मचर्य है। जो ब्रह्म के आरचरण में चले, वही ब्रह्मचारी है। आप इसे आत्मसात कर ब्रह्म में लीन होने का प्रयत्न करं। दिन के दो बजे अनंत चतुर्दशी के अवसर पर आर्यिका विभाश्री माता जी के सानिध्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। यात्रा के दौरान रथ पर विराजमान भगवान की प्रतिमा, झांकी और हेमंत सेठी के भक्ित गीतों पर नाचते-झूमते श्रद्धालु आकर्षण का केंद्र बने रहे। इसमें शामिल श्रद्धालु जेजे रोड, राधेश्याम लेन, कचहरी चौक, महावीर चौक के रास्ते अपरबाजार होते हुए वापस मंदिर पहुंचे। मंदिर पहुंचने पर पुन: भगवान जीनेंद्र की प्रतिमा स्थापित कर अभिषेक-पूजन किया गया।ड्ढr समाज के अध्यक्ष छीतरमल गंगवाल, मंत्री निर्मल रारा, पूर्व अध्यक्ष धर्मचंद रारा, महावीर प्रसाद सोगानी, प्रदीप बाकलीवाल, सुरश पांडेया और कमल काला यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे। शाम में आरती के बाद बनारस के फूलचंद जन प्रेमी ने ब्रह्मचार्य धर्म पर अपने विचार व्यक्त किये। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया।आज सम्मानित किये जायेंगे व्रतधारीरांची। पयरुषण पर्व के मौके पर इस बार भी सात व्रतधारियों ने भक्ित की शक्ित का परिचय दिया। 11 दिन तक लगातार निर्जला और निराहर रह कर अपनी निष्ठा का सबूत दिया। ब्रह्मचारिणी गीता दीदी, प्रसन्न कुमार पाटनी, शकुंतला देवी छाबड़ा, ममता अजमेरा, सुश्री मनिषा गंगवाल और हीरा देवी बड़ाात्या व्रतधारण करने वालों में मुख्य हैं। निर्मल रारा ने बताया कि सोमवार को मंदिर में अभिनंदन समारोह आयोजित किया जायेगा। इसमें दशलक्षण पर्व के अवसर पर तप और तपस्या कर रहे सात व्रतधारियों सहित विद्वान फूलचंद प्रेमी को सम्मानित किया जायेगा। समारोह आठ बजे से शुरू होगा।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: ब्रह्म में लीन होना ही ब्रह्मचर्य : विभाश्री