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राजधानी में चार स्थानों से निकली शोभायात्रा

मातृशक्ित सम्मेलन शुरू होने के पहले राजधानी के चार स्थानों से शोभायात्रा निकाली गयी। सभी का सम्मेलन स्थल हरमू मैदान में मिलन हुआ। शोभायात्रा जिला स्कूल प्रांगण, रांची गोशाला, अरगोड़ा चौक तथा निवारणपुर तपोवन मंदिर से निकाली गयीं। शोभा यात्रा में शामिल महिलाएं नारी शक्ित को लेकर नार लगा रहीं थीं।ड्ढr भव्य मंच सज्जा : मातृशक्ित सम्मेलन के लिए भव्य पंडाल में आकर्षक मंच का निर्माण किया गया था। मंच पर एक कोने में निर्मित मंडप में सिंहवाहिनी भारत माता की प्रतिमा स्थापित की गयी थी। मंच के मध्य में अगल-बगल साध्वी ऋतंभरा और कुसी सुदर्शन के बैठने की व्यवस्था थी।ड्ढr संघ प्रमुख से की मंत्रणाड्ढr मातृशक्ित सम्मेलन संपन्न होने के बाद साध्वी ऋतंभरा संघ के सरसंघचालक कुसी सुदर्शन से मिलने उनके प्रवास स्थल पर गयीं। श्री सुदर्शन यहां एमएल पोद्दार के आवास पर ठहर हैं। साध्वी की उनके साथ तकरीबन एक घंटे तक गुप्त मंत्रणा हुई। वह शाम सात बजे डेक्कन विमान से दिल्ली लौट गयीं। श्री सुदर्शन सोमवार को बोकारो-एलेप्पी से रवाना होंगे। कोख में पल रही कन्या की हत्या रोके सेवा भारती, झारखंड प्रदेश के तत्वावधान में रविवार को हरमू मैदान में मातृशक्ित सम्मेलन का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि आज नारी हत्यारी की भूमिका में है। कन्या भ्रूण की हत्या किये जाने से लड़कियों की संख्या घट रही है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि कोख में पल रही कन्या की हत्या बंद करं।ड्ढr साध्वी ने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में नारी की भूमिका होती है। उसकी गोद में परमात्मा भी धन्य होता है। देश के संतों और शहीदों के उत्थान में मातृशक्ित ही प्ररक रही है। उन्होंने मातृशक्ित सम्मेलन स्थल को तीर्थ स्थल की संज्ञा दी। उन्होंने रोष प्रकट किया कि इन दिनों सेटेलाइट चैनलों के माध्यम से कुसंस्कार पैदा करने और मातृशक्ित के स्वरूप को भंग करने का प्रयास हो रहा है।ड्ढr पति-पत्नी के बीच अधिकारों की भाषा सिखायी जा रही है, जबकि संतान, परिवार और समाज के लिए जीना ही भारतीय स्त्री का मर्म है।ड्ढr उन्होंने महिलाओं को ललकारते हुए कहा कि यह मातृशक्ित को तय करना है कि भारतीयता कैसे बनी रहेगी। इसे कैसे बचायेंगे। अपने परिवार को संस्कार देना है। उन्होंने कहा कि मैं शाश्वत राम के पथ पर चलने का संदेश देती हूं, जो केवल नारा नहीं बल्कि विश्वास है।ड्ढr मातृशक्ित चाहे, तो कुछ भी संभव : सुदर्शनड्ढr इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक कुसी सुदर्शन ने कहा कि जब मातृशक्ित जगती है, तो दुनिया की कोई शक्ित उसे रोक नहीं सकती। कश्मीर में अमरनाथ भूमि को लेकर चले आंदोलन में एक लाख 74 हजार महिलाओं ने हिस्सा लिया। जेल भरो आंदोलन में हिस्सा लिया। इसके बाद सरकार को झुकना पड़ा।ड्ढr उन्होंने कहा कि हिंदू संस्कृति में स्त्री-पुरुष एक दूसर के पूरक हैं। करुणा, प्रम, आत्मीयता, दया नारी के गुण हैं। श्री सुदर्शन ने ईसाइयों पर सेवा की आड़ में धर्मातरण का आरोप लगाते हुए कहा कि उड़ीसा में लक्ष्मणानंद जी और अन्य की हत्या में ऐसे ही तत्वों का हाथ है। उन्होंने कहा कि पोप ने इस संदर्भ में टिप्पणी की और हमारी सरकार ने उन्हें टोका तक नहीं। उन्होंने कहा कि लक्ष्मणानंद 40 वर्षो तक लोगों में जागृति लाकर धर्मातरण रोकने में सफल रहे थे।ड्ढr आयोजन में योगदानड्ढr मंच संचालन पूनम आनंद ने किया। गायक दीपक तिर्की ने भजन प्रस्तुत किया। आरती सिंह ने शिव वंदना प्रस्तुत की। दोनों को साध्वी ऋतंभरा और श्री सुदर्शन ने आशीर्वाद दिया। शांति पाठ से सम्मेलन का समापन हुआ। स्वागताध्यक्ष मीरा मुंडा ने स्वागत किया। सेवा भारती की राष्ट्रीय संयोजिका वीणा महतो, अंजु पांडेय, मंजुषा देशमुख, माया सिंह, सेवा भारती के क्षेत्रीय प्रमुख गुरुशरण प्रसाद, प्रेम अग्रवाल, शेखर अग्रवाल, ओपी केारीवाल, अखिलेश्वर नाथ मिश्र, सीपी सिंह, यदुनाथ पांडेय, डॉ एचपी नारायण, डॉ समर सिंह आदि उपस्थित थे।ड्ढr भरा था पंडालड्ढr सम्मेलन का पंडाल भरा हुआ था। 25 हजार से भी अधिक महिलाओं के जुटने का दावा सही साबित हुआ। दिन में बारिश भी हो गयी थी, लेकिन आयोजन पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा।ड्ढr व्यवस्थित था सब कुछड्ढr प्रदेश के 13 अंचलों से पहुंची महिलाओं के लिए पंडाल में बैठने की अंचलवार व्यवस्था की गयी थी। स्वयंसेवक और स्वयं सेविकाएं सहायता के लिए तत्पर थीं।ं

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