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ट्रिगर के बदले माउस पर थिरकीं अंगुलियां

चाकू और कट्टा चलाकर पल भर में ही किसी को मौत नसीब कर देने वालों ने जब समाज की मुख्यधारा से जुड़कर अपनी नयी पहचान बनाने की कोशिश की तो उनकी यह कोशिश देखकर वे पर्यवेक्षक भी विस्मित रह गए जो सोमवार को ऐसे बंदियों के प्रतिभा की परीक्षा लेने बेऊर जेल गए थे। कारा प्रशासन की पहल पर जेल में बंद बंदियों को उच्च शिक्षा दिलााने के आलोक में जेल के छब्बीस बंदियों ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय के एक माह के कम्प्यूटर प्रशिक्षण पाठय़क्रम में हिस्सा लिया था। विश्वविद्यालय द्वारा इन सभी बंदियों का नि:शुल्क नामांकन किया गया था।ड्ढr ड्ढr विश्वविद्यालय और जेल सूत्रों के अनुसार इस पाठय़क्रम के पूरा होने के बाद सोमवार को इन बंदियों ने लिखित और प्रायोगिक (प्रैक्िटकल) दोनों विषयों में परीक्षाएं दीं। परीक्षार्थी बंदियों ने जब प्रायोगिक परीक्षा के दौरान कम्प्यूटर पर अपने हाथ दिखाने शुरू किए तो वहां मौजूद नालंदा खुला विश्वविद्यालय के मुख्य कंम्प्यूटर समन्वयक सह पर्यवेक्षक अमरनाथ पांडेय व डीएनपी वर्मा तो विस्मित हुए ही जेल अधिकारी भी अपने इन बंदियों की प्रतिभा को देख हैरान हो गए। बताया जाता है कि प्रायोगिक परीक्षा के दौरान कुछ बंदियों ने तो कंम्प्यूटर पर अपने हाथ इस ढंग से दिखाए मानों इस फन में वो पूर्व से ही माहिर हैं। जेल अधीक्षक दिलीप कुमार ने बताया की सभी परीक्षार्थियों ने शांति के साथ परीक्षाएं दीं। गौरतलब है कि नालंदा खुला विश्वविद्वालय ने प्रथम बार बेउर जेल में परीक्षा केन्द्र बनाया है जहां सिर्फ बंदी परीक्षार्थी परीक्षा दे रहे हैं।

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  • Web Title: ट्रिगर के बदले माउस पर थिरकीं अंगुलियां