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हर तरफ मारामारी -कैसे कटेगी जिन्दगी

शहरवासी हर तरफ से परशान है। न बिजली मिल रही है न रसोई गैस। केरोसिन के लिए हाहाकार मचा है तो लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। गंभीर संकट पर न सरकार की नजर पड़ रही है न जनप्रतिनिधियों की। प्रशासन चुप है तो बिजली बोर्ड के अधिकारी एक दूसर पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं। लोग समझ नहीं आ रहे कि फरियाद करं तो किससे। हालत इतनी खराब है कि बिना स्नान के लोग कार्यालय जा रहे हैं तो सुबह में बच्चों को स्कूल जाने में परशानी हो रही है। उमसभरी गर्मी में लोग रात जगकर गुजार रहे हैं। बरारी वाटर वक्र्स के प्लांट ठीक कर दिए जाएं या सबौर ग्रिड में 50 एमवीए का ट्रांसफार्मर लग जाए। जब तक बिजली की आपूर्ति में सुधार नहीं होगा तब तक परशानी बनी रहेगी। सोमवार को अलीगंज और नाथनगर सबस्टेशन के बीच 33 हजार वोल्ट का तार टूटने से नाथनगर और चम्पानगर क्षेत्र में दिनभर आपूर्ति ठप रही। बरारी सबस्टेशन में भी ब्रकर खराब होने से आपूर्ति बाधित हुई।ड्ढr ड्ढr आठ दिनों से बिजली की करंट से शहरवासी परशान हैं। कभी 10 तो कभी 20 मेगावाट बिजली मिलती है। अधिक बिजली अगर मिल भी जाती है तो जर्जर आपूर्ति व्यवस्था के कारण घरों तक नहीं पहुंच पाती। कहीं तार टूट रहे हैं तो कहीं फ्यूज उड़ रहा है। रात होने के साथ भी बोर्ड के अधिकारी भी भगवान भरोसे आपूर्ति छोड़ देते हैं। अलीगंज सबस्टेशन में सोमवार की सुबह दो बजे से आई खराबी के कारण नाथनगर, चम्पानगर, वि. वि. क्षेत्र, साहिबगंज, परबत्ती आदि मुहल्लों में बिजली आपूर्ति बाधित है। शाम में पांच मिनट के लिए बिजली का दर्शन हुआ उसके बाद आपूर्ति बाधित हो गई। दो दर्जन से अधिक मुहल्लों में दिनभर पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। देर रात तक बिजली आपूर्ति ठप थी। विद्युत कार्यपालक अभियंता ने बताया कि तार को ठीक किया जा रहा है। सबौर ग्रिड दो दिनों से 30 मेगावाट बिजली आपूर्ति का दावा कर रहा है लेकिन वह बिजली कहां जा रही है इसका जवाब बोर्ड के अधिकारियों के पास नहीं है। सबसे अधिक बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। रसोई गैस की किल्लत बनी हुई है। कुछ गैस एजेंसियों के यहां 70 दिन बाद भी सिलेन्डर की आपूर्ति नहीं हो रही है। उपभोक्ताओं की प्रतीक्षासूची बढ़ते जा रही है। केरोसिन तेल 40 से 50 रुपये लीटर ब्लैक में मिल रहा है। पेयजल किल्लत की हालत यह है कि दुकानदार हाथ जोड़ लेते हैं। सड़क किनार सरकारी नलों पर पानी के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। घर का कामकाज कैसे हो इसको लेकर महिलाएं परशान है। शहरवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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