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राजेंद्रनगर टर्मिनल की बेस किचेन: ग्यारह बजे से ही व्यस्त

दिन के 11 बजते ही व्यस्त हो जाता है राजेंद्रनगर टर्मिनल पर स्थित बेस किचेन। पटना-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए भोजन पका रहा बेस किचन प्रतिदिन 3000 लोगों का भोजन तैयार करने की क्षमता रखता है। पांच सितारा होटल की तर्ज पर बने इस किचेन में 25 कर्मचारी कार्यरत हैं। गैस पाइप लाइन के सहार सात बड़े चूल्हे जलते हैं। साथ ही 40 पराठे एक साथ बनाने की क्षमता वाला तावा है। चार लोग मिलकर एक साथ पराठा सेकते हैं।ड्ढr ड्ढr बेस किचेन के सहायक प्रबंधक राजेश कुमार बताते हैं कि प्रतिदिन पूर्वाह्न् 11 बजे संभावित यात्रियों की सूची मिलती है। इसके बाद भोजन पकाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। दस डिग्रीधारी कूक मिलकर भोजन तैयार करते हैं, जिनमें चार एक्सपर्ट हैं। बिना कैप व फेस माउस पहने किचेन में प्रवेश करना वर्जित है। पैकिंग करने के लिए आठ कर्मचारी रखे गए हैं। राजेश बताते हैं कि कुछ कच्ची खाद्य सामग्रियां भी ट्रेन में भेजी जाती है। प्रथम श्रेणी व अधिकतम दस बीमार यात्रियों के लिए ट्रेन में भी पकाने की सुविधा है। बीमार लोगों के लिए डिमांड पर सादी रोटी, दाल व सब्जी ट्रेन में बनती है। जिन बीमार यात्री को सादा भोजन परोसा जाता है, उन्हें चिकेन, पनीर, पराठे नहीं दिए जाते। फूड इन्सपेक्टर के द्वारा जांच करने के बाद ही भोजन की पैकिंग की जाती है।ड्ढr ड्ढr भोजन में 100 ग्राम चावल, (पका हुआ) 150 ग्राम दाल, 150 ग्राम चिकेन जिसमें 75 ग्राम ग्रेवी रहती है, 40 ग्राम सलाद, 50-50 ग्राम के दो पराठे व 150 ग्राम सूप दिए जाते हैं। इसके अलावा आइसस्क्रीम परोसी जाती है। श्री कुमार बताते हैं कि देश का यह पहला बेस किचेन है, जिसका आईआरसीटीसी ने स्वयं अपनी देख-रख में निर्माण किया है। वर्तमान में राजधानी एक्सप्रेस के करीब 600 यात्रियों को प्रतिदिन भोजन बनता है। भविष्य में गरीब रथ समेत अन्य कई ट्रेनों की कैटरिंग आईआरसीटी सी अपने जिम्मे लेने की योजना बना रही है।

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