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दिल्ली ब्लास्ट: हिली पाटिल की कुर्सी

ांग्रेस आलाकमान गृहमंत्री शिवराज पाटिल से सख्त नाराज है। बेशक वे अभी मंत्री पद से नहीं हटाये जा रहे, पर देर सबेर एसा हो भी सकता है। वैसे पाटिल ने कहा है कि उन्हें कांग्रेस और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी का पूरा विश्वास प्राप्त है। लेकिन सोमवार को जब सोनिया गांधी ने दिल्ली में हुए आतंकवादी हमलों, उड़ीसा और कर्नाटक में ईसाई मिशनरियों पर हो रहे हमलों के मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं के साथ आपात बैठक की तो सीधे आंतरिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार शिवराज पाटिल को नहीं बुलाया गया। इस बैठक में विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी, रक्षा मंत्री एंटनी, कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल, पार्टी कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, महासचिव जनार्दन द्विवेदी, दिग्विजय सिंह, मार्गरट अल्वा और मीडिया प्रमुख वीरप्पा मोइली शामिल थे।ड्ढr ड्ढr राजनीतिक गलियारों में दिन भर चर्चा रही कि पाटिल की छुट्टी कभी भी हो सकती है। इस बार में दिलचस्प बात यह कि संप्रग के एक प्रमुख घटक राजद के सुप्रीमो लालू यादव ने भी पाटिल के मंत्रालय की एक के बाद एक विफलताओं की जमकर आलोचना की। उन्होंने शनिवार की सुबह श्रीमती गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर इस मसले पर सर्वदलीय बैठक तथा मंत्रिमंडल की विशेष बैठक बुलाने की मांग की। यादव ने श्रीमती गांधी से कहा कि आतंकवादी घटनाओं के मामले में पाटिल की कार्यशैली के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है। उन्होंने पाटिल की क्षमता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया और कहा कि इन घटनाओं से जनता में शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास घटता जा रहा है। लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।ड्ढr ड्ढr यदि आंतरिक सुरक्षा के हालात ऐसे ही चलते रहे तो चुनाव में यूपीए को भारी नुकसान हो सकता है। आतंकवादी हमलों के मद्देनजर पाटिल न सिर्फ विपक्ष बल्कि सत्तारूढ़ यूपीए के नेताओं के भी निशाने पर आ गए हैं। अनौपचारिक बातचीत में यूपीए सरकार के मंत्री, यहां तक कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंत्रियों ने भी आतंकवादी हमलों के गंभीर संकट के समय भी पाटिल के कपड़े बदलने में व्यस्त रहने, रटे रटाए बयान जारी करने की कार्यशैली को लेकर उन्हें सरकार पर बोझ बताना शुरू कर दिया है। लेकिन कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आतंकवादी हमलों के मद्देनजर पाटिल के त्यागपत्र की विपक्ष की मांग को अधिकृत रूप से खारिा करते हुए कहा कि ऐसे गंभीर संकट के समय विपक्ष को इस तरह की मांग कर अस्थिरता पैदा करने की ओछी राजनीति नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि राजग शासन में इस तरह के आतंकवादी हमलों के समय कितनी बार तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से त्यागपत्र मांगा गया और उन्होंने कितनी बार त्यागपत्र दिया था।

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