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तमिलों की सुरक्षा को लेकर विश्व चिंतित

संयुक्त राष्ट्र ने श्रीलंका में सेना और विद्रोही संगठन लिबरेशन टाईगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के बीच पूवर्ोत्तर तटीय क्षेत्र में जारी अंतिम दौर के जबरदस्त सैन्य संघर्ष के बीच युद्ध क्षेत्र में फंसे हजारों तमिलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संरा की प्रवक्ता मेरी आेकाबे ने बुधवार रात संवाददाताअआें को बताया कि युद्धक्षेत्र में घमासान लड़ाई के कारण हताहतों की वास्तविक संख्या का भी पता नहीं चल पाया है और युद्ध प्रभावित क्षेत्र में अभी भी हजारों स्थानीय तमिल नागरिकों के फंसे होना गंभीर चिंता का विषय है। आेकाबे ने बताया कि राहत सहायता सामग्री भी प्रभावित इलाकों में पंहुचाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि 1अप्रैल को पंहुचने वाली 1200 टन राहत सामग्री अब तक नहीं पंहुच पाई है। लड़ाई के कारण गत एक अप्रैल से कोई राहत सामग्री युद्ध प्रभावित इलाकों में नहीं पंहुचाई जा सकी है। ज्ञातव्य है कि इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की बुधवार को अनौपचारिक बैठक हुई, जिसमें श्रीलंका के मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता जताई गई। बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में मैक्िसको के राजदूत क्लाउड हेलर ने संवाददाताआें से कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्य श्रीलंका में जारी गंभीर मानवीय संकट और संघर्ष क्षेत्र में फंसे हजारों लोगों की तकलीफों से चिंतित हैं। बंद कमरे में हुई बैठक के बारे में जानकारी देते हुए हेलर ने बताया सदस्य देशों ने तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) की कड़ी आलोचना की जो संघर्षक्षेत्र में फंसे आम नागरिकों को मानव ढाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने श्रीलंका में उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है जहां सेना और तमिल विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष में हजारों नागरिक फंसे हुए हैं। इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद की बुधवार को अनौपचारिक बैठक हुई। बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र में मैक्िसको के राजदूत क्लाउड हेलर ने संवाददाताआें से कहा कि सुरक्षा परिषद के सदस्य श्रीलंका में जारी गंभीर मानवीय संकट और संघर्षक्षेत्र में फंसे हजारों लोगों की तकलीफों से चिंतित हैं। बंद कमरे में हुई बैठक के बारे में जानकारी देते हुए हेलर ने बताया सदस्य देशों ने तमिल विद्रोही संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) की कड़ी आलोचना की जो संघर्षक्षेत्र में फंसे आम नागरिकों को मानव ढ़ाल के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। परिषद के सूत्रों के मुताबिक चीन, रूस और कई अन्य सदस्यों ने इसे श्रीलंका का आंतरिक मामला बताते हुए इस पर औपचारिक बहस कराने का विरोध किया। यही कारण है कि परिषद ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाते हुए मौजूदा अध्यक्ष हेलर को बैठक के बारे में प्रेस को जानकारी देने के लिए अधिकृत किया। अमेरिका की विदेश मंत्री हिलेरी क्िलंटन ने भी श्रीलंका में सेना और विद्रोही संगठन के बीच पूवर्ोत्तर तटीय क्षेत्र में जारी जबरदस्त सैन्य संघर्ष के बीच युद्ध क्षेत्र में फंसे हजारों तमिलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। क्िलंटन ने प्रतिनिधि सभा में विदेश मामलों की समिति को बताया कि श्रीलंका सरकार को लिट्टे के साथ हर हाल में इस समस्या के राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत का रास्ता तलाशना चाहिए, जिससे युद्ध के कारण निदर्ोष तमिलों को अनावश्यक रूप से पिसने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि श्रीलंका सरकार इस बाते से भलीभांति वाकिफ है कि इस स्थिति से पूरा विश्व चिंतित है। क्िलंटन ने कहा कि पिछले 25 साल से चली आ रही इस समस्या के कारण निदर्ोष जनता ने भारी कीमत चुकाई है। उन्होंने मौजूदा हालात को भयावह मानवीय त्रासदपूर्ण स्थिति बताते हुए कहा कि अमेरिका ने श्रीलंका सरकार पर युद्ध को रोकने का काफी दबाव बनाया है, जिससे युद्धक्षेत्र में अभी भी फंसे हजारों स्थानीय तमिल नागरिकों को सुरक्षित निकलने का रास्ता मुहैया कराया जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लिट्टे की तरफ से भी शांति प्रयासों में मदद की कोई उम्मीद न होने के कारण उनका पूरा ध्यान निदर्ोष नागरिकों को सुरक्षित निकालने पर है। क्िलंटन ने कहा कि युद्धविराम होते ही या हालात में मामूली नियंत्रण होने पर भी अमेरिका युद्ध प्रभावित इलाकों में व्यापक पैमाने पर राहत कार्य शुरू करने पर जोर देगा। उन्होंने बताया कि इसकी तैयारी के लिए आेबामा प्रशासन श्रीलंका के बारे में अमेरिकी चिंता से सरोकार रखने वाले अपने सहयोगियों के साथ विचार विमर्श कर रहा है।

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