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खटाल के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया निरस्त

खटाल पुनर्वास के लिए पुनदाग क्षेत्र में करीब 21.15 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए शुरू की गयी कार्यवाही को हाइकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं करने के कारण यह कार्यवाही निरस्त की है। जस्टिस डीाीआर पटनायक की अदालत ने कहा है कि सरकार जनहित में जमीन अधिग्रहण कर सकती है, लेकिन उसे भू अर्जन अधिनियमों का पालन भी करना चाहिए।ड्ढr खटाल पुनर्वास के लिए पुनदाग क्षेत्र में सरकार ने कई निजी भूखंडों का अधिग्रहण करने के लिए कार्यवाही शुरू की थी। इसके खिलाफ 21 लोगों ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी और भू अर्जन को नियमों के खिलाफ बताया था। प्रार्थियों का कहना था कि भू अर्जन पदाधिकारी ने जमीन अधिग्रहण के लिए अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित किया। भू-स्वामियों को नोटिस नहीं दिया गया, जबकि नियमों के तहत भू स्वामियों को नोटिस दिया जाना चाहिए। इसके बाद जमीन मालिकों से आपत्ति मांगने का प्रावधान भी है। ऐसा नहीं किया गया। सरकार ने इसे आपातकालीन स्थिति का अधिग्रहण बताया है। प्रार्थियों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति तब होती है, जब कोई प्राकृतिक आपदा आती है। प्रार्थियों की ओर से सीनियर वकील पीके प्रसाद, प्रकाश चंद्रा, आरएस मजुमदार एवं अन्य ने बहस की। कोर्ट आदेश के बावजूद क्यों नहीं हुई जांचाई करते हुए हाइकोर्ट ने 107 को मुख्य सचिव को इस मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। साथ ही प्रार्थी को भी इसके लिए आवेदन देने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट को बताया गया कि प्रार्थी ने आवेदन दिया, लेकिन उसके आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अवमानना याचिका दायर की गयी। 21.8.08 को कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस मामले की जांच करा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन न तो जांच करायी गयी और न ही कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी। अदालत ने इस पर नाराजगी जाहिर की और मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण देने को कहा। इस याचिका में कहा गया है कि राज्य में जन वितरण प्रणाली एवं अंत्योदय योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। वरीय संवाददाता रांची राज्य में जन वितरण प्रणाली एवं अंत्योदय योजना में हो रही गड़बड़ी पर हाइकोर्ट ने मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र एवं जस्टिस डीके सिन्हा की कोर्ट ने मुख्य सचिव को बताने को कहा है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्होंने उपरोक्त योजनाओं की गड़बड़ी की जांच क्यों नहीं करायी एवं इसकी रिपोर्ट अदालत में क्यो नहीं प्रस्तुत की गयी? मुख्य सचिव को 22 अक्तूबर तक इसका जवाब देने को कहा गया है।ड्ढr जनहित याचिका की सुनव

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