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बुद्धदेव की लत से करोड़ों का नुकसान

मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के सिगरेट पीने के कारण पश्चिम बंगाल को कई मिलियन डालर की अन्तर्राष्र्ट्ीय मदद राशि से हाथ धोना पड़ा है। यह राशि कोलकाता को धूम्रपान रहित इलाका बनाने के मकसद से आम नागरिकों को सचेत करने के लिए मिलनेवाली थी। विश्व स्वास्थ संगठन ने ब्लूमवर्ग इनसिएटिव नामक संस्था से यह राशि कोलकाता को देने का आग्रह किया था। किन्तु संस्था ने कहा कि जिस राज्य के मुखिया स्वयं सार्वजनिक तौर पर सिगरट पीते हैं, उस राज्य के लिए यह राशि कैसे आवंटित की जा सकती है? ब्लूमवर्ग इनसिएटिव एक अन्तर्राष्र्ट्ीय संस्था है, जो कम आय वाले सभी देशों को धूम्रपान की लत घटाने के लिए जनजागरण हेतु भारी मात्रा में आर्थिक मदद करती रही है। कोलकाता के लिए प्रस्तावित परियोजना में वह संस्था कई लाख डालर भेजनेवाली थी। विश्व स्वास्थ संगठनके एक अधिकारी के मुताबिक बाते छह महीनों में संस्था से कई मर्तबा यह राशि देने का आग्रह किया गया पर बुद्धदेव भट्टाचार्य के सिगरट पीने के अभ्यस्त होने के कारण संस्था ने मदद देने से मना कर दिया। समीक्षाओं में देखा गया है कि हाल के वर्षो में कोलकाता में धूम्रपान करनेवालों की संख्या दूसर शहरों की तुलना में तीन गुनी ज्यादा हो गई है। राज्य की 70 फीसदी आबादी धूम्रपान करती है। इस बाबत विश्व स्वास्थ संगठन के पदाधिकारी का कहना है कि जिस राज्य का मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक तौर पर सिगरट पीता है और यह लत नहीं छोड़ने की घोषणा करता है, उस राज्य में आम आदमी को धूम्रपान के विरुद्ध सजग-सचेत करना क्या आसान है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए. राम दास ने मंगलवार को मुख्यमत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से से सिगरट की लत छोड़ने की फिर अपील की। दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे पहले भी बुद्धदेव बाबू से यह आग्रह कर चुके हैं, फिर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को दो अक्टूबर से सभी कार्यस्थलों पर धूम्रपान पर रोक लगाने को कहा है।ं

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