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नगर निगम एक परिचय

रांची नगर निगम : तथ्यों के आईने में10 के दशक में रांची में नगर पालिका थी एवं उस कालखंड में रांची नगर पालिका में आठ वार्ड थे। 1में रांची नगर पालिका का पहला चुनाव हुआ था। रांची नगरपालिका 10 के दशक में रांची नगर निगम बना एवं रांची नगर निगम का पहला चुनाव 22 साल बाद 21.03.1ो हुआ था। उस कालखंड में रांची नगर निगम क्षेत्र में 37 वार्ड थे, अत: 37 पार्षद ही चुने गये थे। पार्षदों ने वार्ड 7 के पार्षद उदय प्रताप सिंह को मेयर एवं वार्ड 28 के पार्षद मो. जनुल को डिप्टी मेयर चुना था। बाद में वार्ड 2 के पार्षद अशोक कुमार सिंह को मेयर एवं वार्ड 3 के पार्षद बिजेंद्र सिंह ईश्वर को पार्षदों ने डिप्टी मेयर चुना था। पुन: 22 साल बाद रांची नगर निग का दूसरा चुनाव मार्च 2008 में संपन्न हुआ। यहां एक यक्ष प्रश्न उभर कर आ रहा है कि रांची नगर निगम का 22 की प्रेत-छाया से ग्रसित है? क्या रांची नगर निगम अपना कार्यकालस पूरा कर पायेगा? या सरकार बीच में ही निगम को भंग कर पुन: निगम को शहरी विकास मंत्रालय के माध्यम से प्रशासक नियुक्त कर अपनी इच्छानुसार चलायेगी। हमें अच्छाई की ही आशा रखनी चाहिए। 2008 का यह चुनाव कई कारणों से महत्वपूर्ण रहा है, जिसका हम क्रमबद्ध तरीके से अध्ययन करंगे।ड्ढr रांची नगर निगम क्षेत्र का काफी विस्तार हुआ है। निगम क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगभग 8.50 लाख हो गयी है, जिसमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 4.50 लाख एवं महिला मतदाताओं की संख्या 4.00 लाख है। इनमें अनुसूचित जनजाति की मतदाताओं की संख्या 1.75 लाख एवं अनुसूचित जाति की मतदाताओं की संख्या 0.40 लाख है। क्षेत्र विस्तार एवं जनसंख्यामतदाता में अत्यधिक वृद्धि के कारण निगम क्षेत्र में अभी 55 वार्ड बनाये गये हैं, जिनमें अनुसूचित जनजाति के लिए 12 वार्ड, अनुसूचित जाति के लिए अवार्ड एवं ओबीस के लिए 12 वार्ड-कुल 27 वार्ड आरक्षित किये गये हैं।ड्ढr वार्डो के सीमांकन में आबादीमतदाता एवं भौगोलिक स्थिति पर अधिक महत्व दिया जाता है, पर वार्डो का सीमांन ऐसा किया गया है कि वार्डो के मतदाताओं की संख्या पर कुछ भी ध्यान नहीं दिया गया है। 55 वार्डो का ही सीमांकन गलत है। रांची नगर निगम क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या 8.50 लाख के करीब है, अत: मतदाता के अनुसार प्रत्येक वार्ड की मतदाता संख्या औसतन 15,500 होनी चाहिए, पर भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए औसत मतदाता संख्या में कम-बेशी अनिवार्य है, फिर भी यह अंतर दो-तीन हाार से अधिक नहीं होनी चाहिए। पर सीमांन पर गौर करं तो पता चलेगा कि सीमांकन का आधार क्या रहा है।0आदिवासी-गैर आदिवासी नहीं, झारखंडी-गैर झारखंडी की बात होगी ं

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