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यहाँ तो कमचाोर है तीसरी आँख

अपराधियों और आतंकियों पर शिकांा कसने के लिए क्लो सर्किट कैमरों की योना महा कागाी साबित हुई है। पायलेट प्रोोक्ट के तौर पर हारतगां कोतवाली और आसपास कैमर तो लगे, पर वे महा खानापूर्ति भर हैं। कमाोर लेंस के कारण इनकेोरिए बस ट्रैफिक पर नार रखीोा सकती है। धमाके या अन्य वारदात के बाद आरोपित का चेहरा पहचानना बेहद मुश्किल है।ड्ढr हारतगां कोतवाली में इंट्रीगेटेड मार्केटिंग इन्टरप्राक्षेा की ओर से पायलेट प्रोोक्ट के तहत आठ क्लो सर्किट कैमर लगाए गए थे। इनकेोरिए हारतगां कोतवाल के कमर में लगे टीवी में आसपास के सभी क्षेत्रों की गतिविधियों पर नार रखीोा सकती है। इंटरनेट केोरिए आला अधिकारी भी इन कैमरों केोरिए हर गतिविधि को अपने कम्प्यूटर पर सीधे देख सकते हैं। हारतगां में लगे सीसी कैमरों से हवालात, कोतवाली के कार्यालय,ोनपथ बार के इंट्रेंस, संकट मोचन मंदिर के सामने व चौराहे पर नार रखीोाती है। कैमर 24 घंटे चालू रहते हैं और 20 दिनों की रिकार्डिग मेमोरी उपलब्ध है लेकिन अब तक इस रिकार्डिग को कहीं सुरक्षित नहीं किया गया है। मेमोरी फुल होने पर उसे डिलीट कर दियाोाता है। इंस्पेक्टर हारतगां आीत सिंह चौहान के अनुसार कैमरों मेंोूम करने की क्षमता कम है। पिक्चर को क्लो करने पर वह धुंधली होोाती है। हाँ इन कैमरों केोरिए ट्रैफिक व भीड़भाड़ को देखाोा सकता है। गाड़ियों का रंग व माडल पहचानेोा सकते हैं, पर उनकी नंबर प्लेट नार नहीं आती। दूसरी ओरोनपथ बार में व्यापारियों की ओर से लगवाए गए दो सीसी कैमर बारिश की ोंट चढ़ गए। नक्खास चौराहे पर भीोुलूस के दौरान सीसी कैमरा लगवाने की योना बनी थी। एएसपी पश्चिम परश पाण्डेय के मुताबिकोुलूस के दौरान दो दिन किराए पर कैमर लगवाएोाएँगे एसएसपी अखिल कुमार का कहना है कि आतंकी हमलों व अपराधियों पर नार रखने के लिए कई माह पहले सीसी टीवी प्रोोक्ट की रिपोर्ट पीएचक्यू को ोी गई थी। इसको मांूरी मिलने पर सबसे पहले अमीनाबाद, कैसरबाग समेत अन्य इलाकों में इन्हें लगायाोाएगा।ं

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