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संतन को अब सिर्फ सीकरी सो काम!

‘संतन को कहा सीकरी सो काम’ केोमाने अब लद गए। मोह माया त्यागने वाले कई साधु-संत सरकारी सुरक्षा पाने के लिए बेचैन हैं। इसके लिए दाँव-पेच कर रहे हैं। संसद मेंोाने की ललक है। इसके लिए पार्टी नेतृत्व कीोी हाूरी भी कर रहे हैं। चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने के लिए वे सार तीर चला रहे हैंोो घुटे राानेता चलाते हैं। यहाँ तक कि अपने ही चेलों द्वारा अपने लिए आतंकी संदेश भिावाने से भी गुरा नहीं कर रहे।ड्ढr पूर्व सांसद व अयोध्या के वशिष्ठ पीठाधीश्वर के महंत राम विलास वेदांती को आतंकियों की धमकी और उनके काफिले पर हमले के पीछे कीोो कहानी सामने आई है उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वे अपना सुरक्षा काफिला बड़ा करना चाहते हैं। इसके पहले भी वह सरकार पर सुरक्षा देने के लिए दबाव बनाते रहे हैं। अकेले वेदांती ही क्यों, अयोध्या के एक र्दान साधुओं ने सरकारी सुरक्षा पाने के लिए शासन में आवेदन कर रखा है। यह सब सुरक्षा के लिए नहीं बल्कि रौबदाब के लिए यादा है।ड्ढr राम विलास वेदांती मछलीशहर और प्रतापगढ़ से सांसद रह चुके हैं। वहोहाँ से चुनाव लड़े, दोबारा लौट कर नहीं गए। अब वह गोण्डा से चुनाव लड़ना चाहते हैं। गोण्डा से टिकट मिलोाए इसके लिए वह सोमवार को फैााबाद में पार्टी अध्यक्ष राानाथ सिंह को विदा करने हवाई पट्टी तकोा पहुँचे।ड्ढr राम विलास वेदांती ने कुछ दिनों पहले हंगामा किया कि उन्हें आतंकवादियों से खतरा है..धमकियाँ दीोा रही हैं। उन्होंने शिकायत की थी कि यह धमकी अलकायदा की तरफ से है।ोाँच में पता चला यह धमकी आतंकी संगठन ने नहीं बल्कि उनके दो परम शिष्यों प्रमोद कुमार और रमेश चन्द्र ने ोी थी। प्रमोद और रमेश बारंग दल सेोुड़े हैं और गोण्डा के नवाबगां के रहने वाले हैं। गोण्डा से ही वेदांती चुनाव लड़ना चाहते हैं। इससे एक साल पहले भी वेदांती आरोप लगा चुके हैं कि अल कायदा ने उन्हें धमकी भरा पत्र ोा है। इसके बाद काफी हंगामा भी रहा।ड्ढr पिछले दिनों भाापा ने मुद्दा बनाया कि वेदांती के काफिले पर नवाबगां में हमला हुआ है। इस बार में एक ज्ञापन भी रायपाल को दिया गया था।ोाँच में यह बात साफ हो गई है कि वेदांती के लौटने के बाद नवाबगां में कुछ झड़पें हुई थीं लेकिन उनके काफिले पर कोई हमला नहीं हुआ।ड्ढr रामान्म भूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास को भी पत्र द्वाराोान से मारने की कथित धमकी आई थी।ोाँच में पता चला कि धमकी ोने वाले हरिद्वार के थे और नृत्य गोपाल दास के ही शिष्य थे।ड्ढr कथित धमकियों का यह खेल नया नहीं है। इसके पहले भी कई साधु यह आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा माबूत कीोाए। इन धमकियों के नाम पर ही अयोध्या में लगभग एक र्दान साधु सुरक्षा पाने की लाइन में हैं।

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