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कोसी पर किताब पढ़ रहे हैं मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों कोसी पर किताब पढ़ रहे हैं। कोसी में कुसहा तटबंध के टूटने के बाद कोसी की गति-प्रकृति और प्रलय की धार को जानना हर बिहारी के लिए जरूरी है। पुलिस महानिदेशक डी.एन.गौतम खूब पढ़ते और लिखते भी रहे हैं। पुलिस महानिदेशक को बाढ़ पर लिखी कुछ किताबें पसंद आइर्ं।ड्ढr ड्ढr गौतम साहब ने मुख्यमंत्री को दिनेश कुमार मिश्र की किताबें पढ़ने को दीं। कोसी पर लिखी गई किताबें बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों के दौर के उन्हें समय भेंट की गई थीं। सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कोसी के उद्गम और पाटों के बदलने की कहानी को पढ़ा। किताबों में कोसी के लोगों के जीवन, कोसी की धार बदलने और उसके टूटने का सिलसिलेवार ब्यौरा है। मुख्यमंत्री ने अपने एक मित्र को बताया कि किताब बहुत अच्छी है। कोसी पर लिखी किताब पढ़ने से नदी की गति-प्रकृति को समझने में मदद मिली ।कोसी के तटबंधों और हाईडैम को लेकर जारी बहस का मसला भी बिहार सरकार से जुड़ा हुआ है।ड्ढr बाढ़ के जानकार कुसहा के टूटने के बाद यह भी कहने लगे हैं कि नदी की इस धार को बांधना नहीं चाहिए। यूं दिनेश कुमार मिश्र की लिखी गई किताब-दुई पाटन के बीच में फिलहाल चर्चा में है। यह किताब हाल में अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई है।ड्ढr ड्ढr इस किताब को पढ़ कर कोसी को समझा जा सकता है।इसे आजकल जद यू प्रवक्ता शिवानंद तिवारी भी पढ़ रहे हैं। बिहार की नदियों पर हिन्दी में पहला काम किसी इांीनियर अथवा नदियों को जानने वाले विद्वान ने नहीं किया था। बिहार की नदियों पर सबसे सुंदर काम एक राजनैतिक व्यक्ित व लेखक स्व.हवलदार त्रिपाठी सह्दय द्वारा लिखी गई किताब- बिहार की नदियां है। बिहार की नदियों पर इस किताब की तरह जीवंत हिन्दी में लिखी गई और कोई किताब नहीं है। बिहार की प्राय: सभी नदियों पर इस किताब में विस्तार से चर्चा की गई है। कोसी की धार बदलने से बराज बनने तक की कथा इस किताब में शामिल है।

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