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अन्य देशों से करार टालने को तैयार नहीं भारत

भारत ने हल्का कूटनीतिक दबाव बनाते हुए अमेरिका से कहा है कि 123 द्विपक्षीय परमाणु समझौते को कांग्रेस से यदि जल्दी मंजूरी नहीं मिली तो वह अन्य देशों के साथ परमाणु समझौतों को अधिक देर तक लटकाने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमेरिका की यात्रा पर रवाना होने वाले हैं, जहां 25 सितम्बर को राष्ट्रपति जार्ज बुश के साथ उनकी मुलाकात तय है। दोनों देशों में इस बात की आशा व्यक्त की जा रही है कि इसी दिन दोनों व्यक्ति परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। लेकिन यह केवल तभी संभव है जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन प्रतिनिधि सभा और सीनेट 25 सितम्बर के पहले समझौते को मंजूरी प्रदान कर दें। एक अधिकारिक सूत्र ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि भारत के 123 समझौते के सम्पन्न होने तक अन्य देशों के साथ परमाणु करार को अंतहीन इंतजार के लिए तैयार रहने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्हांेने कहा कि यह अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह समझौते की कांग्रेस में जल्दी मंजूरी को सुनिश्चित करे। परमाणु आपूर्ति समूह के देशों से छह सितम्बर को छूट मिलने के बाद भारत तकनीकी रूप से एनएसजी के किसी सदस्य देश से साथ परमाणु सहयोग समझौता कर सकता है। लेकिन आईएईए से सेफगार्ड समझौते और एनएसजी से छूट दिलाने मंे अमेरिकी भूमिका के चलते भारत राजनीतिक रूप से 123 समझौते के पूरा होने के पहले किसी अन्य देश से परमाणु करार नहीं करना चाहता है। अमेरिका की नजर भारत को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु व्यापार की छूट के बाद पैदा होने वाले 40 से 100 अरब डालर के बाजार पर भी है। भारत ने यह संकेत दिया है कि यदि अमेरिका ने समझौते में देरी की तो वहां की कंपनियांे को नुकसान उठाना पड़ सकता है। रूस और फ्रांस के साथ भारत के परमाणु समझौते केवल अमेरिका के साथ 123 परमाणु करार के पूरी तरह संपन्न होने के कारण रूके हुए हैं।

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