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अदालतों में लौटने लगी रौनक

अदालतों में धीर-धीर रौनक लौटने लगी है। कोसी की बाढ़ से मधेपुरा की अदालतें ठप हो गई थीं। पर कामकाज सामान्य होने में अभी महीनेभर का समय लग सकता है। एडवोकेट सरो भारती के मुताबिक बुधवार को मात्र एक दर्जन वकील कचहरी आए। पिछले सोमवार से डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में जमानतों की सुनवाई शुरू हो गई है। बाढ़ का पानी घटने तो लगा है पर पूरी तरह निकला नहीं है। परिसर में अब भी कहीं-कहीं पानी जमा है। हलचल बढ़ रही है। अधिकारी और कर्मचारी तो कार्यालय आते हैं पर वकीलों की संख्या कम है। मुवक्िकल नदारद। जिला मुख्यालय से संपर्क भंग है। आलमनगर, चौसा, किशुनगंज, ग्वालपाड़ा, मुरलीगंज आदि जगहों से सड़क संपर्क नहीं है। न ट्रेन, न बस। नाव भी नहीं। लाचारी है। आवागमन अवरुद्ध है। राष्ट्रीय राजमार्ग 106 और 107 कई जगहों पर टूट गये हैं। मुवक्िकल अपने वकीलों से मोबाइल फोन से संपर्क साधकर लम्बी तारीख लेने का अनुरोध करते हैं। बहुत जरूरी होने पर लोग आलमनगर से सौर-सोनवरसा वाली सड़क पकड़कर वाया बैजनाथपुर मधेपुरा पहुंचते हैं। फिलहाल तो सिर्फ सिंहेश्वर, घेलाड़ और गम्हरिया से जिला मुख्यालय का सम्पर्क कायम है। बाढ़ के शुरुआती दिनों में कार्यालयों में 3-4 फीट तक पानी जमा था। पर अधिकारी और कर्मचारी तब भी आते थे। कमर में पानी नहीं गया था। सिर्फ तारीखें लगती थीं। अब पानी लगभग निकल गया है। इस स्थिति में फिलहाल बदलाव की उम्मीद नहीं । लिहाजा दशहरा-दिवाली-छठ के बाद ही कामकाज सामान्य हो पाएगा। मधेपुरा में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट, सेशन कोर्ट, सीजेएम कोर्ट भी हैं। बाढ़ के कारण मधेपुरा जेल से सभी कैदियों को सहरसा ले जाया गया था। बाढ़ के कारण कोर्ट में उपस्थित होना उनके लिए संभव नहीं था। उधर प्रशासनिक कामकाज सामान्य है। बाढ़ राहत कार्य जोरों से चल रहा है। मधेपुरा सहित सुपौल, सहरसा में जलस्तर घटता जा रहा है। निकासी न होने से कुछ जगहों पर पानी जमा है जिसे निकलने या सूखने में समय लगेगा। जानकारों का मानना है कि 15 अक्तूबर तक हालात सामान्य हो जाएंगे।

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