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विदेशी पत्रिकाओं के प्रकाशन को मिली अनुमति

ेन्द्र सरकार के इस फैसले से प्रिंट मीडिया को नई ताकत मिल सकती है। सरकार ने भारत में खबरों और सामयिक विषयों पर आधारित विदेशी पत्रिकाओं के भारतीय संस्करण के प्रकाशन को अनुमति देते हुए इसमें 26 प्रतिशत विदेशी पूंजी की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद विदेशी समाचार पत्रिकाएं अपने स्थानीय संस्करणों को भारत में कम कीमत पर शुरू कर पाएंगी। अभी तक विदेशी प्रकाशनों को भारत में केवल अपना फेसीमाइल एडीशन (उपग्रह संस्करण) लाने की इजाजत थी। अमेरिका की टाइम और ब्रिटेन की इकॉनॉमिस्ट जसी पत्रिकाओं के एसे संस्करण भारत में ऊंची कीमतों (भारतीय पत्रिकाओं की तुलना में) में उपलब्ध हैं। सूचना व प्रसारण मंत्री प्रियरांन दासमुंशी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले के बार में कहा कि भारत सरकार ने इस संबंध में अपनी मौजूदा प्रिंट मीडिया नीति में बदलाव लाने का फैसला किया है। नई नीति के तहत , भारत में विदेशी पत्रिकाओं को लाने के लिए भारतीय प्रकाशक को नई कंपनी में 74 प्रतिशत स्वामित्व रखना होगा। अनुमति तभी मिलेगी जब भारतीय कंपनी के निदेशक मंडल में तीन चौथाई भारतीय होंगे और पत्रिका का नाम भारतीय कानून के तहत पंजीकृत किया जाएगा। भारतीय प्रकाशक यहां छपने वाली विदेशी पत्रिकाओं में भारतीय सामग्री और स्थानीय विज्ञापन भी डाल सकेगा। दासमुंशी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से भारतीय पाठकों को विदेशी पत्रिकाएं सस्ती कीमतों में उपलब्ध हो सकेंगी।

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